बलजीत गिल .
बीबीएन, बीकानेर | भारत–पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े सरकारी दस्तावेज़ों और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों की पड़ताल से एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। पिछले पाँच वर्षों में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने 268 घुसपैठियों को गिरफ्तार किया, जबकि 2021 और 2022 में पंजाब, राजस्थान और गुजरात सेक्टर में घुसपैठ के मामलों में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। ड्रोन के ज़रिये ड्रग–तस्करी, हाइब्रिड इन्फिल्ट्रेशन मॉडल और ISI समर्थित नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं।
🔴 लगातार बढ़ रहीं घुसपैठ की कोशिशें
BSF और गृह मंत्रालय से उपलब्ध आँकड़ों के मुताबिक, 2017 से 2021 के बीच एक भी वर्ष ऐसा नहीं रहा, जब पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की कोशिशें शून्य रही हों। कुल 268 गिरफ्तारियाँ बताती हैं कि सीमा पर निगरानी मजबूत होने के बावजूद घुसपैठ की गतिविधियाँ लगातार सक्रिय हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ये प्रयास सिर्फ अवैध प्रवेश तक सीमित नहीं, बल्कि ड्रग–तस्करी, जासूसी मॉड्यूल और आतंक-समर्थित नेटवर्क से भी जुड़े होते हैं।
🔴 2021: BSF की कड़ी निगरानी में 45 घुसपैठिए दबोचे गए
2021 में सीमा सुरक्षा बल ने विभिन्न सेक्टरों विशेषकर पंजाब, राजस्थान और गुजरात में 45 संदिग्धों को घुसपैठ करते हुए पकड़ा।कई मामलों में उनके पास GPS ट्रैकर, नाइट-विजन गैजेट, ड्रग पैकेट बरामद किए गए। BSF अधिकारियों का कहना है कि “रात, कोहरा और रोके गए नालों का इस्तेमाल घुसपैठिए अब भी करते हैं, लेकिन अधिकांश प्रयास त्वरित कार्रवाई में नाकाम कर दिए जाते हैं।”
🔴 राजस्थान फ्रंटियर 2022: 50 गिरफ्तार, 10 पाक नागरिक शामिल
राजस्थान सेक्टर से 2022 में हुई गिरफ्तारियाँ एक बड़ा संकेत हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसी साल 50 घुसपैठिए पकड़े गए, जिनमें 10 पाकिस्तानी नागरिक थे। यह इलाका ड्रग–स्मगलरों और मानव-तस्करी नेटवर्क के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है।
🔴 2023–2025: पंजाब–कच्छ–जम्मू में पैटर्न जारी
हालिया मीडिया रिपोर्टों में 2023 से 2025 के बीच कई कार्रवाइयों का खुलासा हुआ है। पंजाब में संदिग्ध गतिविधियों में पाक नागरिक लगातार पकड़े जा रहे हैं। कच्छ (गुजरात) में सीमा पार करने की कोशिश में कई लोग गिरफ्तार हुए। जम्मू सेक्टर में ड्रोन की आवाजाही, सुरंगों और नाइट-रूट्स से घुसपैठ बढ़ी, लेकिन सुरक्षा बलों ने ज्यादातर प्रयास विफल कर दिए।
🔴 हाइब्रिड इन्फिल्ट्रेशन: सुरक्षा एजेंसियों की सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञ बताते हैं कि घुसपैठ अब सिर्फ पारंपरिक तरीके से नहीं हो रही। यह एक हाइब्रिड मॉडल में बदल चुकी है। ड्रोन के ज़रिये हथियार व ड्रग ड्रॉप, सीमा के संवेदनशील मार्गों का उपयोग, स्थानीय नेटवर्क के साथ समन्वय और अंत में मानव घुसपैठ। यह पूरा चैन नई तकनीक और आधुनिक उपकरणों की मदद से लगातार सक्रिय है।
🔴 खतरा अभी भी बरकरार
BSF की लगातार चौकसी से कई नेटवर्क टूटे हैं, लेकिन सीमा की भौगोलिक चुनौतियाँ और तकनीक आधारित घुसपैठ सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि “यह खतरा कम नहीं हुआ, बल्कि अपना स्वरूप बदलकर और अधिक जटिल हो गया है।”




