नरेंद्र आर्य |
बीबीएन, नेटवर्क। पंजाब और हिमाचल प्रदेश के प्रमुख जलाशयों भाखड़ा डैम, पौंग डैम (महाराणा प्रताप सागर) और रंजीत सागर (थीन) डैम के 12 जून 2026 सुबह 6 बजे के जलस्तर और जल प्रवाह आंकड़ों के अनुसार तीनों बांधों में जलस्तर फिलहाल सुरक्षित दायरे में बना हुआ है। सतलुज, ब्यास और रावी नदियों पर बने इन बांधों से नियंत्रित जल निकासी जारी है। वहीं हरिके हेडवर्क्स से राजस्थान फीडर, फिरोजपुर फीडर और माखू नहर में सिंचाई एवं पेयजल आपूर्ति के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान फीडर में 12,045 क्यूसेक तथा फिरोजपुर फीडर में 11,028 क्यूसेक पानी प्रवाहित किया जा रहा है, जो उत्तर-पश्चिम भारत के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
ब्यास नदी पर पौंग डैम: आवक से अधिक निकासी
ब्यास नदी पर स्थित महाराणा प्रताप सागर (पौंग डैम) का जलस्तर 12 जून को सुबह 6 बजे 1326.52 फीट दर्ज किया गया। डैम में 2,185 क्यूसेक पानी की आवक हुई, जबकि 15,129 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे स्पष्ट है कि जलाशय प्रबंधन के तहत संग्रहित पानी का उपयोग सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए किया जा रहा है।
सतलुज नदी पर भाखड़ा डैम: नियंत्रित जल प्रबंधन जारी
उत्तर भारत की जीवनरेखा माने जाने वाले भाखड़ा डैम का जलस्तर 1576.22 फीट रिकॉर्ड किया गया। डैम में 19,074 क्यूसेक पानी की आवक हुई, जबकि 23,150 क्यूसेक पानी की निकासी की गई। विशेषज्ञों के अनुसार मानसून पूर्व अवधि में जलाशय प्रबंधन का उद्देश्य जल भंडारण क्षमता बनाए रखना और आगामी वर्षा ऋतु के लिए पर्याप्त स्थान सुरक्षित रखना होता है।
रावी नदी पर रंजीत सागर डैम: ब्यास की ओर जल डायवर्जन जारी
रावी नदी पर बने रंजीत सागर (थीन) डैम का जलस्तर 509.850 मीटर (1672.73 फीट) दर्ज किया गया। डैम में 4,028 क्यूसेक पानी की आवक हुई जबकि 13,055 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके अलावा रावी से ब्यास नदी की ओर औसतन 4,208 क्यूसेक पानी डायवर्ट किया जा रहा है। यह अंतर-नदी जल प्रबंधन प्रणाली पंजाब की सिंचाई व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
हरिके हेडवर्क्स से राजस्थान और पंजाब को राहत
ब्यास और सतलुज नदियों के संगम क्षेत्र में स्थित हरिके हेडवर्क्स का पोंड स्तर 690.84 फीट दर्ज किया गया। यहां अपस्ट्रीम जल प्रवाह 22,599 क्यूसेक रहा। इस पानी में से 11,028 क्यूसेक फिरोजपुर फीडर, 12,045 क्यूसेक राजस्थान फीडर तथा 272 क्यूसेक माखू नहर में छोड़ा गया। डाउनस्ट्रीम की ओर कोई अतिरिक्त पानी नहीं छोड़ा गया। राजस्थान फीडर से मिलने वाला पानी राजस्थान के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और बीकानेर सहित कई जिलों की सिंचाई व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच यह आपूर्ति किसानों के लिए राहत भरी खबर है।



