बीबीएन, बीकानेर | पश्चिमी सीमा की सुरक्षा और सैन्य तैयारियों को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से सप्त शक्ति कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मंजिंदर सिंह ने बठिंडा, श्रीगंगानगर और बीकानेर सैन्य स्टेशनों का दौरा कर विभिन्न सैन्य फॉर्मेशनों की ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की। दौरे के दौरान उन्हें चेतक कोर की युद्धक क्षमता, प्रशिक्षण गतिविधियों, ऑपरेशनल लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। आर्मी कमांडर ने सैनिकों की पेशेवर दक्षता, अनुशासन और समर्पण की सराहना करते हुए वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक के उपयोग तथा उभरते साइबर खतरों से निपटने की क्षमता विकसित करने पर विशेष बल दिया।
समीक्षा के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल मंजिंदर सिंह ने विभिन्न सैन्य इकाइयों और प्रशिक्षण सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक और सूचना युद्ध जैसी नई चुनौतियां भी शामिल हो चुकी हैं। ऐसे में प्रत्येक सैनिक और अधिकारी को तकनीकी परिवर्तनों तथा वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य की लगातार जानकारी रखना आवश्यक है।
राजस्थान और पंजाब से सटी पश्चिमी सीमा भारतीय सेना के लिए रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। श्रीगंगानगर और बीकानेर जैसे सैन्य स्टेशन सीमा क्षेत्र में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, सैन्य तैनाती और लॉजिस्टिक सपोर्ट के प्रमुख केंद्र हैं। यही कारण है कि सेना लगातार अपनी युद्धक तैयारियों और प्रशिक्षण मानकों को अद्यतन कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया में हुए हालिया सैन्य अभियानों ने यह स्पष्ट किया है कि ड्रोन, साइबर अटैक, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशंस भविष्य के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। भारतीय सेना भी इसी दिशा में अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रही है और विभिन्न कमांड स्तरों पर तकनीक-आधारित प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है।
आर्मी कमांडर ने सभी रैंक के जवानों की कड़ी मेहनत, लगन और उच्च मनोबल की प्रशंसा करते हुए कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए निरंतर प्रशिक्षण, अनुशासन और तकनीकी दक्षता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने सैनिकों से भविष्य में भी इसी ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ सेवा जारी रखने का आह्वान किया।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी सीमा क्षेत्र में सैन्य तैयारियों की नियमित समीक्षा और आधुनिक तकनीकों का समावेश भारतीय सेना की ऑपरेशनल क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाएगा। इससे सीमा सुरक्षा, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और बहुआयामी खतरों से निपटने की ताकत में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।




