⭕ सेना–मंत्री–समुदाय का संगम: ऑपरेशन दृष्टि बना आशा का प्रकाश स्तंभ
बीबीएन, नेटवर्क। उधमपुर के कमांड अस्पताल (उत्तरी कमांड) में 18 से 22 नवंबर तक आयोजित उन्नत नेत्र चिकित्सा शिविर ‘ऑपरेशन दृष्टि’ ने उम्मीदों से कहीं अधिक प्रभाव और सहभागिता दर्ज की। नई दिल्ली स्थित आर्मी अस्पताल (आर एंड आर) की विशेषज्ञ टीम की भागीदारी से संचालित इस शिविर में 2,000 से अधिक लोगों की जांच की गई और 400 से अधिक जटिल नेत्र शल्य प्रक्रियाएँ मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और रेटिना संबंधी सफलतापूर्वक संपन्न हुईं। जम्मू-कश्मीर के उधमपुर, डोडा, राजौरी, पुंछ, किश्तवाड़ और रामबन जैसे दुर्गम इलाक़ों से सेवारत कर्मियों, वीर नारियों, आश्रितों और स्थानीय नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
शिविर का नेतृत्व वरिष्ठ नेत्र शल्य चिकित्सक ब्रिगेडियर एस.के. मिश्रा ने किया, जिन्हें राष्ट्रपति स्तर की शल्य विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। 20 नवंबर को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शिविर का निरीक्षण किया, मरीजों से संवाद किया और अस्पताल में उपलब्ध अत्याधुनिक सुविधाओं व निःशुल्क स्क्रीनिंग कार्यक्रमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सेना युद्धकाल में अद्वितीय साहस का परिचय देती है और शांति के समय मानवीय सेवा की अलौकिक मिसाल पेश करती है।
दूरस्थ पुंछ के 72 वर्षीय सुरिंदर सिंह, जो वर्षों से अंधेपन और सीमा-पार गोलाबारी से उपजे मानसिक आघात से जूझ रहे थे, अपनी दृष्टि वापस पाकर भावुक हो उठे। वहीं, मेंढर के 56 वर्षीय सेवानिवृत्त सैनिक अब्दुल्ला शफीक ने संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में चिकित्सा पहुँच को जीवनरेखा बताया। इस शिविर ने 96 वर्षीय राजकुमारी देवी को भी स्पष्ट दृष्टि का उपहार दिया, जो इसके प्रभाव का सबसे मार्मिक उदाहरण बनकर उभरीं।
‘ऑपरेशन दृष्टि’ की पहल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के अनुरोध पर की गई थी। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के निर्देशों पर डीजी एएफएमएस और डीजीएमएस (आर्मी) ने शिविर की सुनियोजित रूपरेखा तैयार की। सैन्य चिकित्सा की उच्चतम विशेषज्ञता और संवेदनशील तैनाती क्षेत्र की जरूरतों के मेल ने इसे सीमांत समुदायों के लिए दुर्लभ और जीवन-परिवर्तनकारी स्वास्थ्य मिशन बना दिया।



