बीबीएन, नेटवर्क । पश्चिमी सीमाओं की सुरक्षा और भविष्य की युद्ध चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना के सप्त शक्ति कमांड की दो दिवसीय फॉर्मेशन कमांडर्स कॉन्फ्रेंस जयपुर में आयोजित की गई। 5 और 6 जून को हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य, सीमा क्षेत्रों की चुनौतियों, तकनीकी बदलावों, साइबर सुरक्षा, ड्रोन आधारित युद्ध क्षमता और सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में चल रहे प्रयासों की व्यापक समीक्षा की गई। कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता सप्त शक्ति कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने की। बैठक में भविष्य की सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप सेना की ऑपरेशनल तैयारी को और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई।
बदलते युद्ध स्वरूप पर विशेष मंथन
सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने माना कि आधुनिक युद्ध अब केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर अटैक, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और रियल टाइम निगरानी प्रणालियां युद्ध की दिशा तय कर रही हैं। ऐसे में सेना की तैयारी भी तकनीक आधारित और बहुआयामी होनी आवश्यक है। आर्मी कमांडर ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियों का प्रभावी उपयोग ही भविष्य की चुनौतियों से निपटने की कुंजी होगा। उन्होंने मिशन प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए व्यावहारिक, योजनाबद्ध और मूल्यांकन आधारित प्रशिक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया।
पश्चिमी सीमा की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है सप्त शक्ति कमांड
सप्त शक्ति कमांड भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण कमानों में शामिल है। इसका मुख्यालय जयपुर में स्थित है और इसकी जिम्मेदारी राजस्थान तथा गुजरात के बड़े सीमा क्षेत्रों की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। पाकिस्तान से लगती लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की निगरानी, रेगिस्तानी इलाकों में सैन्य तैयारी और सीमाई सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल दायित्व इसी कमांड के अधीन आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में ड्रोन घुसपैठ, सीमा पार तस्करी और तकनीकी निगरानी की चुनौतियों ने सेना को अपनी रणनीतियों में तेजी से बदलाव करने के लिए प्रेरित किया है। ऐसे में इस प्रकार की कमांड कॉन्फ्रेंस भविष्य की सुरक्षा रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक पर बढ़ता जोर
बैठक में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को लेकर भी चर्चा हुई। भारतीय सेना लगातार स्वदेशी ड्रोन, निगरानी प्रणालियों, संचार उपकरणों और आधुनिक हथियार प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। रक्षा मंत्रालय के “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत सेना में स्वदेशी तकनीकों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है, जिससे विदेशी निर्भरता कम करने का लक्ष्य तय किया गया है।
साइबर सुरक्षा बनी प्राथमिकता
कॉन्फ्रेंस में साइबर सुरक्षा को भविष्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल बताया गया। सैन्य नेटवर्क, कम्युनिकेशन सिस्टम और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए नई तकनीकों और सुरक्षा उपायों पर विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य के संघर्षों में साइबर हमले पारंपरिक सैन्य कार्रवाई जितने ही प्रभावी साबित हो सकते हैं।
प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टुकड़ियों का सम्मान
कॉन्फ्रेंस के दौरान विभिन्न सैन्य प्रतियोगिताओं की भी समीक्षा की गई। ड्रोन सब-यूनिट प्रतियोगिता, अंतर-फॉर्मेशन स्पोर्ट्स प्रतियोगिता और जनरल जे.जे. सिंह निशानेबाजी प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली सैन्य टुकड़ियों को सम्मानित किया गया। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य सैनिकों में परिचालन दक्षता, निशानेबाजी कौशल, शारीरिक क्षमता और टीम वर्क को बढ़ावा देना है। आर्मी कमांडर ने विजेताओं को सम्मानित करते हुए सभी प्रतिभागियों की व्यावसायिकता, समर्पण और प्रतिस्पर्धी भावना की सराहना की।




