🔴 भारत का ‘स्वयं रक्षा कवच’: तेजस लड़ाकू विमान अब होगा और भी जानलेवा
बीबीएन, नेटवर्क। भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम में एक और बड़ी छलांग लगाते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अत्याधुनिक ‘स्वयं रक्षा कवच (SRK)’ प्रणाली का सफल उड़ान परीक्षण शुरू कर दिया है। यह आधुनिक एयरबोर्न इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) सूट आने वाले समय में तेजस Mk1A को आसमानी खतरों से सुरक्षा की नई परत देने जा रहा है।
यह प्रणाली तेजस को न केवल दुश्मन राडार और मिसाइल सिस्टम से बचाएगी, बल्कि उसे एक ‘स्मार्ट सर्वाइवर’ में बदल देगी जो किसी भी संघर्ष क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को गुप्त रखते हुए सटीक जवाब देने में सक्षम होगा। SRK का फुल डिप्लॉयमेंट 2026 के अंत तक प्रस्तावित है।
🔸 स्वदेशी तकनीक से निर्मित, पुरानी कमियों पर फतह
DRDO के सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (CABS) द्वारा विकसित SRK परियोजना को 2021 में मंज़ूरी दी गई थी। इसका मकसद था भारतीय वायुसेना के पुराने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर गैप्स को भरना और विदेशी उपकरणों पर निर्भरता घटाना। एक अधिकारी ने बताया “नेटवर्क्ड वॉरफेयर के दौर में जहां मिसाइलें और राडार झुंड में हमला करते हैं, SRK हमारा आत्मरक्षा कवच है।”
🔸 AI-सक्षम खतरा पहचान और 360 डिग्री कवरेज
SRK प्रणाली में उन्नत AI-ड्रिवन थ्रेट प्रायोरिटाइजेशन, सिग्नल इंटेलिजेंस और रेड्यूस्ड साइज-वेट-पावर (SWaP) जैसे गुण हैं। इसमें दोहरी संरचना Radar Warning Receiver (RWR) और Advanced Self-Protection Jammer (ASPJ) शामिल हैं, जो तेजस को चारों ओर से रक्षा कवच प्रदान करते हैं, बिना उसके एयरोडायनामिक्स को प्रभावित किए।
🔸 दुश्मन राडार को मात देने की क्षमता
तेजस के फ्यूज़लेज में लगा नया GaN-बेस्ड RWR सिस्टम 250 किमी से अधिक दूरी पर दुश्मन मिसाइलों जैसे HQ-9 और PL-15 की पहचान कर सकता है। यह रियल-टाइम डाटा को उत्तम AESA राडार से जोड़कर पलभर में काउंटरमेज़र जारी करता है।SRK की मशीन लर्निंग तकनीक ‘फॉल्स अलार्म’ को 40% तक घटाती है और पायलट का भरोसा बढ़ाती है।
🔸 2026 तक पूरा होगा परीक्षण
DRDO ने हाल ही में कर्नाटक के चित्रदुर्ग स्थित एरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में SRK के ग्राउंड ट्रायल शुरू किए हैं। अब उड़ान परीक्षणों का दौर HAL बेंगलुरु में जारी है। संगठन का लक्ष्य जून 2026 तक परीक्षण पूरे कर प्रमाणन हासिल करना है। SRK के सफल समावेश के बाद तेजस Mk1A भारतीय आकाश की रक्षा में और भी सशक्त हथियार साबित होगा एक ऐसा कवच, जो न केवल देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि भविष्य की हवाई जंगों में निर्णायक बढ़त भी देगा।
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