बीबीएन, नेटवर्क। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर ओशो फ्रेग्रेन्स से जुड़े भारत और नेपाल के विभिन्न ध्यान केंद्रों में योग, ध्यान और आंतरिक जागरूकता पर केंद्रित विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। सोनीपत, गुरुग्राम, मुरादाबाद और नेपाल की राजधानी काठमांडू सहित अनेक केंद्रों में सैकड़ों साधकों ने भाग लेकर योग को स्वस्थ जीवन और ध्यान को मानसिक संतुलन का आधार बताते हुए इसे दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रमों में योगाभ्यास, प्राणायाम, ध्यान प्रक्रियाओं, आध्यात्मिक संवाद तथा नए साधकों को दीक्षा प्रदान करने जैसी गतिविधियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
सोनीपत के कुमाशपुर रोड स्थित श्री रजनीश ध्यान मंदिर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में करीब 125 साधकों ने सहभागिता की। सुबह के सत्र में योगासन और प्राणायाम के माध्यम से शरीर को ऊर्जावान बनाने तथा मन को एकाग्र करने की विधियां सिखाई गईं। प्रतिभागियों ने सामूहिक अभ्यास के दौरान स्वास्थ्य और सकारात्मकता का अनुभव किया।
इसके बाद आयोजित ध्यान सत्र में ओशो अनुज सद्गुरु स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती ने योग और ध्यान के परस्पर संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य और आंतरिक संतुलन दोनों के लिए इनका समन्वय आवश्यक है। उनके मार्गदर्शन में साधकों ने मौन, साक्षीभाव और आत्म-अवलोकन की प्रक्रियाओं का अभ्यास किया।
दोपहर के सत्र में माँ अमृत प्रिया ने प्रेम, करुणा और सजगता को ध्यान का मूल आधार बताते हुए साधना की गहन विधियों पर प्रकाश डाला। इसी अवसर पर कई नए साधकों को माला दीक्षा प्रदान की गई। समापन सत्र में माँ आस्था ने विशेष ध्यान प्रक्रिया के माध्यम से प्रतिभागियों को तनावमुक्त होकर आंतरिक शांति का अनुभव कराया। मुरादाबाद में होटल प्रेम चुनारिया परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केंद्र संयोजक सुखवीर सिंह ने योग एवं ध्यान की व्यावहारिक उपयोगिता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि नियमित अभ्यास व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक सक्षम बनाता है।
गुरुग्राम के सेक्टर-22 स्थित अम्बियंस क्रिएशन्स में आयोजित योग दिवस समारोह में स्वामी आनंद समाधान ने प्रतिभागियों को जागरूक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। वहीं नेपाल की राजधानी काठमांडू में संचालित ओशो ध्यान केंद्र में माँ अनामिका के नेतृत्व में विशेष योग-ध्यान सत्र आयोजित हुआ, जिसमें आत्मिक विकास और मानसिक शांति के महत्व पर चर्चा की गई।
विभिन्न केंद्रों पर वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक जीवन की बढ़ती व्यस्तता और तनाव के बीच योग एवं ध्यान व्यक्ति को संतुलन, स्थिरता और आत्मविश्वास प्रदान करते हैं। यही कारण है कि इनकी प्रासंगिकता लगातार बढ़ रही है। कार्यक्रमों का समापन सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित साधकों ने योग और ध्यान को जीवन की नियमित साधना बनाने का निर्णय लिया।






