बीबीएन, नेटवर्क | हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक प्रतिस्पर्धा एक नए चरण में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। श्रीलंका के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कोलंबो पोर्ट पर भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस ऐरावत और पाकिस्तानी नौसेना के युद्धपोतों पीएनएस तैमूर, पीएनएस असलात तथा चीन निर्मित पनडुब्बी पीएनएस/एम हांगोर का लगभग एक साथ पहुंचना क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, समुद्री सुरक्षा और चीन-भारत प्रतिस्पर्धा को लेकर नई बहस छेड़ गया है। आधिकारिक तौर पर इसे नियमित पोर्ट कॉल और लॉजिस्टिक गतिविधि बताया जा रहा है, लेकिन सामरिक विशेषज्ञ इसे हिंद महासागर में बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्ष और प्रभाव की लड़ाई के रूप में देख रहे हैं।
हिंद महासागर में क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
कोलंबो पोर्ट विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक पर स्थित है। वैश्विक समुद्री व्यापार का बड़ा हिस्सा हिंद महासागर से होकर गुजरता है। ऐसे में भारत और पाकिस्तान के युद्धपोतों की समानांतर मौजूदगी केवल नौसैनिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक बड़ा सामरिक संकेत मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत लंबे समय से श्रीलंका के बंदरगाहों पर चीन समर्थित सैन्य गतिविधियों को लेकर सतर्क रहा है। पाकिस्तान की ओर से चीन निर्मित पनडुब्बी हांगोर की तैनाती ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है।
चीन फैक्टर ने बढ़ाई संवेदनशीलता
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू चीन का अप्रत्यक्ष प्रभाव माना जा रहा है। हांगोर श्रेणी की पनडुब्बियां चीन की तकनीक पर आधारित हैं और पाकिस्तान की नौसैनिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जाती हैं। भारत पहले भी श्रीलंका के बंदरगाहों पर चीनी अनुसंधान जहाजों और सैन्य प्लेटफॉर्म की मौजूदगी पर आपत्ति जता चुका है। ऐसे में पाकिस्तान के बेड़े की यह यात्रा केवल द्विपक्षीय सैन्य संपर्क नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
आईएनएस ऐरावत की मौजूदगी का क्या संदेश?
भारतीय नौसेना का लैंडिंग शिप टैंक आईएनएस ऐरावत आधिकारिक तौर पर ऑपरेशनल टर्नअराउंड और लॉजिस्टिक आवश्यकताओं के लिए कोलंबो पहुंचा है। हालांकि रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इसका संदेश इससे कहीं बड़ा है। भारत यह स्पष्ट करना चाहता है कि हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी समुद्री उपस्थिति मजबूत है और वह अपने समुद्री पड़ोस में किसी भी सामरिक बदलाव पर पैनी नजर रखे हुए है। यह कदम “सुरक्षा और विकास के लिए क्षेत्रीय सहयोग” (SAGAR) नीति के तहत भारत की सक्रिय समुद्री रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।
श्रीलंका का कठिन ‘बैलेंसिंग एक्ट’
आर्थिक संकट से उबर रहा श्रीलंका इस समय बेहद संवेदनशील कूटनीतिक स्थिति में है। एक ओर भारत संकट के समय सबसे बड़ा आर्थिक सहयोगी बनकर उभरा और अरबों डॉलर की सहायता प्रदान की। दूसरी ओर चीन श्रीलंका का प्रमुख निवेशक और कर्जदाता बना हुआ है, जबकि पाकिस्तान के साथ भी उसके रक्षा संबंध पुराने हैं ऐसे में कोलंबो सरकार किसी एक पक्ष के करीब दिखाई देने के बजाय सभी शक्तियों के साथ संतुलन साधने की रणनीति पर चल रही है। लेकिन यही संतुलन भविष्य में उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती भी बन सकता है।


