🔴ड्रोन युद्ध से आत्मनिर्भर सेना की ओर कदम: ‘अखंड प्रहार’ अभ्यास
बीबीएन, नेटवर्क। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, पीवीएसएम, एवीएसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, सदर्न कमांड ने मंगलवार को त्रि-सेवा युद्धाभ्यास “त्रिशूल” के प्रमुख चरण “अखंड प्रहार” के दौरान कोणार्क कोर की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना और वायुसेना के बीच बहु-क्षेत्रीय एकीकृत अभियानों की क्षमता को परखना और आधुनिक युद्ध तकनीकों में समन्वय को सशक्त बनाना था।
जैसलमेर में अभ्यास के दौरान संयुक्त हथियार अभियानों (Combined Arms Manoeuvres) का प्रदर्शन किया गया, जिसमें ड्रोन और प्रतिरोधी-ड्रोन प्रणालियों, अत्याधुनिक रणनीतियों तथा स्वदेशी नवाचारों का सफल परीक्षण किया गया। इस मौके पर ले. जनरल सेठ ने बैटल ऐक्स डिवीजन और कोणार्क कोर की तकनीकी नवाचार क्षमता, अनुकूलनशीलता और परिचालन तत्परता की सराहना की।
उन्होंने कहा कि सेना की यह पहल “JAI” मंत्र संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार की भावना को साकार करती है। “अखंड प्रहार” न केवल भविष्य के बहु-क्षेत्रीय युद्धक्षेत्र की झलक पेश करता है बल्कि भारतीय सेना की आत्मनिर्भरता और नवप्रवर्तन की दिशा में ठोस कदम भी साबित होता है।
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