बीबीएन, नेटवर्क। जयपुर मिलिट्री स्टेशन में आयोजित सप्त शक्ति सुरक्षा समन्वय सेमिनार का सफल समापन मंगलवार को हुआ। सेमिनार का मुख्य विषय था “भविष्य के संघर्षों का सामना करने हेतु ‘व्होल ऑफ नेशन एप्रोच’।” यह आयोजन सेंटर फॉर लैंड वॉरफेयर स्टडीज़ (CLAWS), नई दिल्ली के सहयोग से सम्पन्न हुआ।
सेमिनार का उद्देश्य था विचारों को व्यावहारिक रणनीति में परिवर्तित करते हुए भारत की भावी सुरक्षा रूपरेखा तैयार करना। इसमें सैन्य नेतृत्व, नीति-निर्माताओं, मीडिया विशेषज्ञों, साइबर विशेषज्ञों और अकादमिक जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
दूसरे दिन के सत्र में सूचना, साइबर और प्रभाव संचालन के लिए एक सुदृढ़ राष्ट्रीय ढांचे के निर्माण पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने भारत के सूचना परिदृश्य की कमजोरियों का विश्लेषण करते हुए वैश्विक प्रवृत्तियों, दुष्प्रचार और ग्रे-ज़ोन खतरों से निपटने की रणनीतियों पर अपने विचार रखे। सूचना युद्ध के बदलते स्वरूप और सोशल मीडिया की निर्णायक भूमिका पर भी विशेष विमर्श हुआ।
अंतिम सत्र में राज्य स्तर पर ‘व्होल ऑफ नेशन एप्रोच’ के क्रियान्वयन हेतु मॉडल ढांचे की रूपरेखा पर विचार किया गया। राजस्थान आधारित केस स्टडी विशेष रूप से चर्चा का केंद्र रही, जिसमें राज्यस्तरीय तैयारी को राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ बताया गया।
दक्षिण पश्चिमी वायु कमान के एओसी-इन-सी ने अपने संबोधन में कहा कि “व्होल ऑफ नेशन एप्रोच को ‘कांसेप्ट टू कल्चर’ और ‘कोऑर्डिनेशन टू कन्विक्शन’ में बदलना समय की मांग है।” उन्होंने कहा कि राष्ट्रहितों की सुरक्षा तभी संभव है जब नागरिक, सरकार और सशस्त्र बल एक समेकित दृष्टिकोण अपनाएं। सेमिनार का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने में प्रत्येक नागरिक की भूमिका समान रूप से महत्त्वपूर्ण है। आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक समन्वय और नागरिक भागीदारी को अनिवार्य बताया गया।
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