बीबीएन, बीकानेर। सूबे के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में अब किताबी ज्ञान के साथ-साथ बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। शिक्षा विभाग ने ‘खुशीशाला’ नाम से एक अभिनव कार्यक्रम शुरू किया है, जो न केवल छात्रों को तनाव मुक्त रखेगा, बल्कि उनके सीखने की क्षमता में भी गुणात्मक सुधार लाएगा। राजस्थान ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है, जो प्राथमिक कक्षाओं (1 से 5) के बच्चों की खुशी और उनके सामाजिक-भावनात्मक कौशल को संवारने के लिए एक सुनियोजित रूपरेखा पर काम कर रहा है।
कैसे काम करेगा ‘खुशीशाला’ मॉडल?
यह कार्यक्रम राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (आरएससीईआरटी) द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत बच्चों को केवल पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों और खेलों के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। बच्चों में जीवन जीने के कौशल विकसित करना इस कार्यक्रम की प्राथमिक प्राथमिकता है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकें।
शिक्षकों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग
इस पूरी प्रक्रिया को धरातल पर उतारने के लिए शिक्षकों को भी विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। आरएससीईआरटी की डायरेक्टर श्वेता फगेड़िया के अनुसार, शिक्षकों के लिए 3 दिन की प्रत्यक्ष ट्रेनिंग और 21 दिनों का एक विशेष ऑडियो-वीडियो कोर्स तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को इतना सक्षम बनाना है कि वे बच्चों के सूक्ष्म हाव-भाव और तनाव को आसानी से पढ़ सकें और उन्हें एक सुरक्षित व सहानुभूतिपूर्ण परिवेश प्रदान कर सकें।
पायलट प्रोजेक्ट की सफलता ने दी उड़ान
कार्यक्रम को लागू करने से पहले 2024 में सिरोही और बांसवाड़ा के चुनिंदा स्कूलों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर परखा गया था। इसमें 120 शिक्षकों को शामिल किया गया था। इस प्रयोग के परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहे और बच्चों के व्यवहार में 53 प्रतिशत का सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया। इतना ही नहीं, शिक्षकों और छात्रों के आपसी संबंधों में भी प्रगाढ़ता आई है।
प्रदेश भर के 1500 स्कूलों में होगा विस्तार
पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, अब राज्य सरकार ने इसे बड़े स्तर पर लागू करने का निर्णय लिया है। वर्तमान में प्रदेश भर के लगभग 1500 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में ‘खुशीशाला’ को विस्तारित किया जा रहा है। इसके लिए बड़े पैमाने पर शिक्षकों को ट्रेनिंग देने की प्रक्रिया जारी है, ताकि शिक्षा के मंदिरों में एक खुशनुमा माहौल तैयार किया जा सके।



