बीबीएन, नेटवर्क |खालिस्तानी उग्रवाद पर बड़ा खुलासा हुआ है। इस गंभीर खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर है। कनाडा की खुफिया एजेंसी सीएसआईएस ने पहली बार “कनाडा-आधारित खालिस्तानी उग्रवादियों” को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताते हुए एजेंसी ने साफ संकेत दिया है कि देश के भीतर ही बैठा एक छोटा लेकिन खतरनाक नेटवर्क लोकतंत्र की आड़ लेकर अलगाववाद और हिंसा को बढ़ावा दे रहा है।
लोकतंत्र की ढाल, अंदर से साजिश का जाल
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ये तत्व कनाडा की खुली व्यवस्था का दुरुपयोग कर कट्टर सोच फैलाने, भोले-भाले लोगों से धन एकत्र करने और उस राशि को विदेशों में हिंसक गतिविधियों के लिए भेजने का काम कर रहे हैं। स्थानीय समाज में पैठ बनाकर संस्थानों तक पहुंच बनाना इनकी रणनीति का हिस्सा है।
धोखे से पैसा, हिंसा के लिए इस्तेमाल
सीएसआईएस के अनुसार, उग्रवादी नेटवर्क आम नागरिकों को झूठे बहानों में फंसाकर चंदा जुटाते हैं। यह धन गुप्त रूप से उन गतिविधियों में लगाया जाता है, जिनका सीधा संबंध हिंसा और अस्थिरता से होता है। एजेंसी ने चेताया है कि यह नेटवर्क भले ही सीमित दिखाई दे, लेकिन इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महसूस किया जा रहा है।
विचार नहीं, हिंसा है असली अपराध
रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि खालिस्तान के समर्थन में शांतिपूर्ण और गैर-हिंसक तरीके से अपनी बात रखना कानून के तहत वैध है। लेकिन जैसे ही यह समर्थन हिंसा, आतंक या अवैध धन के लेन-देन से जुड़ता है, वह सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में आ जाता है।
एयर इंडिया विस्फोट की काली याद फिर ताजा
सीएसआईएस ने Air India Flight 182 bombing का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी है कि 1985 की यह घटना आज भी जिंदा खतरे की याद दिलाती है। 329 लोगों की जान लेने वाला यह हमला कनाडा के इतिहास का सबसे भीषण आतंकी कृत्य माना जाता है।
भारत-कनाडा संबंधों में फिर उभरी तल्खी की आशंका
यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब Canada और India के बीच संबंध सुधारने की कोशिशें चल रही हैं। 2023 में Justin Trudeau के आरोपों के बाद रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। अब Mark Carney के नेतृत्व में माहौल सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन उग्रवाद का मुद्दा दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील विषय बना हुआ है।
खतरा छोटा नहीं, नजरअंदाज करना भारी पड़ेगा
सीएसआईएस की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि कनाडा में सक्रिय यह नेटवर्क केवल एक देश की समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए चुनौती है। लोकतंत्र की आड़ में पनप रहे ऐसे तत्वों पर सख्ती नहीं हुई तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।


