बीबीएन, नेटवर्क। हरियाणा के सोनीपत स्थित श्री रजनीश ध्यान मंदिर में रविवार को एक दिवसीय ध्यान साधना शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 180 साधकों ने भाग लिया। कुमाशपुर रोड, दीपालपुर स्थित केंद्र में आयोजित इस शिविर में डायनेमिक मेडिटेशन, विपश्यना, मूलबंध और देव वाणी ध्यान जैसी विभिन्न विधियों का अभ्यास कराया गया। आयोजन का उद्देश्य प्रतिभागियों को मानसिक शांति, आत्म-जागरूकता और आंतरिक संतुलन से जोड़ना रहा। दिनभर चले सत्रों में ध्यान, मौन, आत्म-अवलोकन और संवाद के माध्यम से साधकों को व्यावहारिक आध्यात्मिक सूत्र समझाए गए।
प्रातः सत्र: डायनेमिक मेडिटेशन से शुरुआत
शिविर का आरंभ सुबह 8 बजे डायनेमिक मेडिटेशन से हुआ, जिसका संचालन आनंद अभय ने किया। इस सत्र में सक्रिय श्वास-प्रक्रिया और शारीरिक गतियों के माध्यम से प्रतिभागियों को संचित तनाव और दबी भावनाओं को मुक्त करने का अभ्यास कराया गया। आयोजकों के अनुसार, इस विधि का उद्देश्य मानसिक बोझ को हल्का कर ऊर्जा के मुक्त प्रवाह का अनुभव कराना है। प्रतिभागियों ने सत्र के बाद स्वयं को अधिक प्रफुल्लित और संतुलित महसूस किया।
विपश्यना में ‘साक्षी भाव’ पर बल
प्रातः 10:15 से 11:45 बजे तक मस्तो बाबा ने विपश्यना ध्यान का मार्गदर्शन किया। इस सत्र में श्वास के अवलोकन के माध्यम से वर्तमान क्षण में स्थित रहने का अभ्यास कराया गया। गहन मौन के वातावरण में साधकों ने सजगता और स्थिरता का अनुभव किया। प्रशिक्षकों ने बताया कि नियमित अभ्यास से मन की चंचलता पर नियंत्रण संभव है।
मूलबंध ध्यान: ऊर्जा जागरण का अभ्यास
दोपहर 12 से 1:30 बजे तक अमृत प्रिया ने मूलबंध ध्यान की विधि समझाई। इस प्रक्रिया में गहरी श्वास, मूलबंध और श्वास-रोक तकनीक के माध्यम से शरीर और मन के संतुलन पर ध्यान केंद्रित कराया गया। सत्र का केंद्र बिंदु आंतरिक ऊर्जा के प्रति जागरूकता और आत्म-अवलोकन रहा।
अनुभव साझा और संवाद
भोजनावकाश के बाद प्रतिभागियों को शैलेन्द्र सरस्वती और अमृत प्रिया के साथ संवाद का अवसर मिला। इस दौरान साधकों ने अपने अनुभव साझा किए और ध्यान की दैनिक जीवन में उपयोगिता पर चर्चा की। मार्गदर्शकों ने बताया कि ध्यान केवल अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन-पद्धति है, जिसे नियमितता और सजगता के साथ अपनाया जाना चाहिए।
देव वाणी ध्यान से समापन
अपराह्न 3 से 4:30 बजे तक प्रेम आस्था ने देव वाणी ध्यान का सत्र संचालित किया। इस अभ्यास में अभिव्यक्ति और मौन के माध्यम से भीतर संचित भावनाओं को मुक्त करने पर बल दिया गया। समापन सत्र में प्रतिभागियों ने गहन शांति और हल्केपन का अनुभव साझा किया।
तनावपूर्ण जीवन में ध्यान शिविरों की बढ़ती आवश्यकता
प्रतिभागियों ने कहा कि वर्तमान समय की भागदौड़ और मानसिक दबाव के बीच ऐसे शिविर मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। आयोजकों ने संकेत दिया कि भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रम नियमित अंतराल पर आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग ध्यान की विभिन्न विधियों से परिचित हो सकें।




