तोपखाना आधुनिकरण योजना को बड़ा झटका
बीबीएन, नेटवर्क, 18 सितंबर। सेना की तोपखाना आधुनिकरण योजना को बड़ा झटका देते हुए भारतीय सेना ने शारंग तोपों की आगे की आपूर्ति रोक दी है। रक्षा सार्वजनिक उपक्रम ‘एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड’ (AWEIL) द्वारा निर्मित तोपों में उपयोग किए जा रहे धातु और अन्य घटकों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर खामियाँ पाई गई हैं। इन कमियों के चलते सेना ने शेष तोपों की खरीद पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
यह निर्णय ऐसे समय आया है जब ऑपरेशन सिंदूर चल रहा है और क्षेत्रीय सुरक्षा की चुनौतियाँ बनी हुई हैं। सेना का कहना है कि जब तक AWEIL दोषों को पूरी तरह दूर कर गुणवत्ता मानकों की गारंटी नहीं देता, तब तक शारंग तोपों की आपूर्ति पर रोक जारी रहेगी।
शारंग परियोजना का लक्ष्य और हालात
वर्ष 2018 में शुरू की गई शारंग परियोजना के अंतर्गत सोवियत काल की 130 मिमी एम-46 तोपों को 155 मिमी/45 कैलिबर मानक में अपग्रेड किया जाना था। लगभग ₹200 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य तोपों की मारक क्षमता को 27 किलोमीटर से बढ़ाकर 39 किलोमीटर तक करना था। पहले यह अनुबंध ऑर्डनेंस फैक्टरी बोर्ड को दिया गया था, जिसे बाद में समाप्त कर AWEIL के अधीन लाया गया।
अब तक 159 तोपें सेना को सौंपी जा चुकी हैं, लेकिन सेना के अधिकारियों ने बताया कि “यांत्रिक, विद्युत, इलेक्ट्रॉनिक और धातुकर्म से जुड़ी गंभीर खामियाँ” पाई गई हैं। इन समस्याओं के चलते शेष 141 तोपों की आपूर्ति रोक दी गई है।
मज़ल ब्रेक की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
सबसे चिंताजनक मामला मज़ल ब्रेक से जुड़ा है। यह हिस्सा तोप की रीकॉइल कम करने और फायरिंग की सटीकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। AWEIL ने 200 मज़ल ब्रेक एक निजी विक्रेता से खरीदे थे, लेकिन सेना ने पाया कि ये घटक आवश्यक मानकों पर खरे नहीं उतरते। खराब गुणवत्ता के कारण न केवल ऑपरेशन की प्रभावशीलता प्रभावित हो रही थी, बल्कि सैनिकों की सुरक्षा पर भी खतरा उत्पन्न हो रहा था।
मार्च 2020 में शारंग तोपों की पहली खेप सेना में शामिल होने के बाद से यांत्रिक और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में बार-बार खराबियाँ सामने आ रही हैं। सेना द्वारा कई बार शिकायत करने और औपचारिक संवाद स्थापित करने के बावजूद दोषों का समाधान नहीं किया गया। अब सेना ने सख्त कदम उठाते हुए शारंग तोपों की आपूर्ति रोक दी है।
जवाबदेही की माँग तेज
रक्षा हलकों में इस घटना को लेकर जवाबदेही तय करने की माँग तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि घटिया धातु और घटकों का उपयोग न केवल सैन्य उपकरणों की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह है, बल्कि यह स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर भी असर डालता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “AWEIL को दो वर्षों से समस्या की जानकारी है। बार-बार विलंब और असफल सुधार सैनिकों की जान जोखिम में डाल रहे हैं और सार्वजनिक धन की बर्बादी का कारण बन रहे हैं।”
पहले भी सवालों के घेरे में रह चुका है रक्षा क्षेत्र
यह पहली बार नहीं है जब तोप निर्माण में गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। CBI दिल्ली स्थित सिद्ध सेल्स सिंडिकेट की जांच कर रही है, जो धनुष तोपों के लिए कथित तौर पर जर्मनी निर्मित बताकर नकली रोलर बेयरिंग की आपूर्ति कर रहा था, जबकि वे चीन निर्मित पाए गए। सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक AWEIL गुणवत्ता से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान नहीं करता, तब तक शारंग तोपों की आपूर्ति स्थगित रहेगी।
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