ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीमा पर सख़्त हुई चौकसी
बीबीएन, नेटवर्क, 17 सितंबर। नापाक पड़ौसी मुल्क पाकिस्तान, भारत में अवैध हथियार बनाने की फैक्ट्री लगाने का मंसूबा पाल रहा है। अवैध हथियार प्रोडक्शन के पीछे मक़सद है, स्लीपर सेल के आतंकियों को भारत से ही हथियार सहजता से मुहैया हो सकें, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीमा पर सख़्त हुई चौकसी के बाद भारत में हथियार सप्लाई करने में लगातार नाकामी हाथ लग गई। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने अब भारत में अपने संपर्क सक्रिय कर दिए हैं। ये नेटवर्क स्थानीय स्तर पर ऐसे लोगों की पहचान कर रहे हैं जिन्हें नजरों से बचाकर गोला-बारूद, विस्फोटक और अन्य हथियार तैयार करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
बंगाल के बर्द्धमान मॉड्यूल की तर्ज पर नेटवर्क का विस्तार
जम्मू-कश्मीर समेत देश के अन्य हिस्सों में आतंकियों तक हथियारों की सुरक्षित और तेज आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आइएसआइ की रणनीति बंगाल के बर्द्धमान मॉड्यूल से प्रेरित बताई जा रही है। 2014 में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर हजारों बम और गोला-बारूद की फैक्ट्रियों का पर्दाफाश किया था।
इंटेलिजेंस ब्यूरो को जानकारी मिली है कि देश भर में हथियार निर्माण हेतु कई छोटी इकाइयाँ स्थापित की जा सकती हैं। इन इकाइयों को कुटीर उद्योगों के रूप में संचालित कर पुलिस की नजर से बचाए जाने की योजना बनाई जा रही है।
राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक
सुरक्षा एजेंसियों ने सभी राज्य पुलिस इकाइयों को केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने की सलाह दी है। मॉड्यूलों पर कड़ी निगरानी न रखी गई तो कुछ ही दिनों में देशभर में कई अस्थायी इकाइयाँ बन सकती हैं, जहाँ बड़े पैमाने पर विस्फोटक और हथियारों का निर्माण संभव होगा।
हवाला चैनलों से धनराशि की आपूर्ति
एजेंसियों के मुताबिक इन इकाइयों के लिए धन की आपूर्ति गुप्त मार्गों से की जाएगी। पाकिस्तान की आइएसआइ भारत में अपने सहयोगियों तक हवाला नेटवर्क के माध्यम से पैसा पहुंचा रही है। बताया जा रहा है कि इसमें खाड़ी देशों से आने वाली रकम का बड़ा हिस्सा शामिल है।
बर्द्धमान मॉड्यूल से सीख, सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क
बर्द्धमान मॉड्यूल का उदाहरण बताता है कि किस तरह बम निर्माण की फैक्ट्रियाँ कुटीर उद्योगों के रूप में चल रही थीं। पटाखा निर्माण इकाइयों में विस्फोटक तैयार किए जा रहे थे, जिससे पुलिस का ध्यान उन पर नहीं गया। भंडाफोड़ के बाद पता चला कि हजारों बम तैयार कर आतंकियों तक पहुंचाए गए थे। सुरक्षा एजेंसियाँ अब किसी भी ऐसी गतिविधि को प्रारंभिक चरण में ही समाप्त करने की कोशिश कर रही हैं।
—




