⭕ ‘सिंधु सभ्यता हमारी जड़ें’: रक्षा मंत्री ने आडवाणी के कथन का किया उल्लेख
बीबीएन, नेटवर्क | दिल्ली में आयोजित सिंधी समाज सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि “सभ्यताओं की धारा सीमाओं से बड़ी होती है” और इसी संदर्भ में उन्होंने पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के एक कथन का ज़िक्र किया। सिंह ने कहा कि आडवाणी जी का मानना था— “बॉर्डर बदल सकते हैं, कौन जानता है, कल सिंध फिर से भारत में वापस आ सकता है।”
सिंह ने कहा कि सिंध, जिसे सिंधी समुदाय का मूल होमलैंड माना जाता है, भारत की प्राचीन सभ्यता का प्रमुख केंद्र रहा है और सिंधु घाटी सभ्यता का मूल आधार भी। उन्होंने बताया कि बंटवारे के बाद भले यह क्षेत्र पाकिस्तान में चला गया हो, लेकिन सांस्कृतिक और सभ्यतागत रूप से यह भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है।
सम्मेलन में रक्षा मंत्री ने कहा कि सिंधु नदी को न केवल हिंदुओं ने पवित्र माना, बल्कि सिंध के कई मुसलमानों का भी विश्वास था कि इसका पानी आब-ए-जमजम जितना ही पवित्र है। उन्होंने आडवाणी की एक पुस्तक का उल्लेख करते हुए कहा कि सिंधी हिंदुओं की पीढ़ियाँ आज भी सिंध को भारत से अलग मानने को तैयार नहीं हो पाती हैं। राजनाथ सिंह ने कहा “जहाँ तक जमीन की बात है, सीमाएँ बदल सकती हैं। लेकिन सभ्यता के स्तर पर सिंध हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा। हमारे सिंधी लोग जहाँ भी हों, भारत की आत्मा से जुड़े हुए हैं।”
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