⭕ बीकानेर की अवन्तिका जोशी ने राष्ट्रीय स्कूल शतरंज चैम्पियनशिप में जीता स्वर्ण
बीबीएन, बीकानेर। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित नेशनल स्कूल शतरंज चैम्पियनशिप में बीकानेर की 14 वर्षीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी अवन्तिका जोशी ने अपने शानदार खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर राजस्थान और अपने शहर का नाम रोशन किया है। 26 नवम्बर से 30 नवम्बर तक अगरतला (त्रिपुरा) में चली इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में अवन्तिका ने अपने वर्ग में 6 राउंड में से 5.5 अंक अर्जित कर अपराजित रहते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। उनका यह प्रदर्शन न केवल उनकी कड़ी मेहनत, बल्कि उनके कोच और बीकानेर चेस अकैडमी के व्यवस्थित प्रशिक्षण की भी सफलता को दर्शाता है। यह जीत भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की उनकी राह को प्रशस्त करती है।
अगरतला की धरती पर अवन्तिका जोशी ने अपनी शांत, संयमित और आक्रामक रणनीति का बेजोड़ संगम प्रस्तुत किया। टूर्नामेंट के दौरान उनका खेल देखने लायक था। उन्होंने शुरुआती राउंड्स में ही अपने इरादे साफ कर दिए थे, जब उन्होंने लगातार तीन मजबूत खिलाड़ियों को पराजित किया। महत्वपूर्ण बात यह रही कि पूरे टूर्नामेंट में किसी भी खिलाड़ी को उन्हें हराने का अवसर नहीं मिला; एक मात्र ड्रॉ उन्होंने एक अत्यंत अनुभवी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ खेला।
बीकानेर चेस अकैडमी के प्रमुख कोच और उनके मेंटर, शेर सिंह चौहान ने उनकी जीत पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा, “अवन्तिका की सबसे बड़ी शक्ति उनका अनुशासन और हर मैच से सीखने की ललक है। वह एक असाधारण ‘पोज़िशनल प्लेयर’ हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी सटीक चाल चलती हैं। उनका यह राष्ट्रीय स्वर्ण उनके बड़े लक्ष्य, यानी ‘ग्रैंडमास्टर’ बनने की दिशा में पहला ठोस कदम है।” उन्होंने यह भी बताया कि अब अवन्तिका का अगला लक्ष्य आगामी एशियाई युवा चैम्पियनशिप है, जिसके लिए वह अपनी तैयारी को और धार देंगी।
अवन्तिका की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से बीकानेर के खेल परिदृश्य में एक नया उत्साह संचार हुआ है। स्थानीय प्रशासन, खेल संघों और स्कूल प्रबंधन ने अवन्तिका को बधाई दी है और उनकी भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है। अवन्तिका जोशी अब बीकानेर के अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गई हैं, जो उन्हें शतरंज को एक गंभीर और पेशेवर खेल के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगी। यह स्वर्ण पदक केवल एक जीत नहीं है, बल्कि ‘नारी शक्ति’ और धैर्यपूर्ण रणनीति की विजय का प्रतीक है।



