बीबीएन, बीकानेर। चैत्र नवरात्रि के अवसर पर आयोजित होने जा रहे विराट देवी भागवत कथा यज्ञ महोत्सव से पहले श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए वसंत विजयानंद गिरी ने जीवन में योग्य बनने के लिए कर्म और आचरण सुधारने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति ज्ञान से नहीं, बल्कि विनम्रता और विवेक से प्रकट होती है।
गंगाशहर रोड स्थित अग्रवाल भवन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने श्रद्धालुओं को नवरात्रि के दौरान मां की आराधना पूरे समर्पण और अनुशासन के साथ करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि मनुष्य के मन में प्रतिदिन हजारों विचार उत्पन्न होते हैं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए योग और साधना आवश्यक है। बिना साधना के किसी भी प्रकार की आध्यात्मिक प्रगति संभव नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि जीवन में वास्तविक सुख तभी संभव है जब शांति हो। यदि शांति का अभाव है, तो धन और वैभव भी निरर्थक हो जाते हैं। अपने स्पष्ट वक्तव्य में उन्होंने यह भी कहा कि अनावश्यक प्रयास व्यक्ति को दुख और दरिद्रता की ओर ले जाते हैं, जबकि सही बुद्धि परिस्थितियों को सुधारने की क्षमता रखती है।
19 मार्च से शुरू होगा 11 दिवसीय महोत्सव
आयोजन से जुड़े श्री पार्श्व पद्मावती सेवा ट्रस्ट के अनुसार 19 मार्च से 11 दिवसीय विराट चैत्र नवरात्रि देवी भागवत कथा यज्ञ महोत्सव प्रारंभ होगा। प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक पूजा, जप और विशेष साधनाएं आयोजित की जाएंगी। वहीं दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक काशी के विद्वान पंडितों द्वारा 9 कुंडीय यज्ञ संपन्न होगा। रात्रि 8 बजे से देवी भागवत कथा का वाचन किया जाएगा, जिसमें भक्ति संगीत और भजन संध्या के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव कराया जाएगा। आयोजन के दौरान प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक सभी श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क प्रसादी की व्यवस्था भी की गई है।
व्यापारिक एवं सामाजिक संगठनों की भागीदारी
इस अवसर पर बीकानेर चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम में पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त किया। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों ने भी उपस्थित होकर आयोजन को सफल बनाने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरूकता को भी नई दिशा देगा।



