बीबीएन, नेटवर्क | पहलगाम में हुए आतंकी हमले की पहली बरसी के मौके पर अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में भारत द्वारा एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। ‘आतंकवाद की इंसानी कीमत’ विषय पर आधारित इस प्रदर्शनी में हमले में मारे गए 26 लोगों की कहानी, आतंकवाद के नेटवर्क और सीमापार समर्थन के पहलुओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। इस पहल के जरिए भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने आतंकवाद के खिलाफ कड़ी जवाबदेही की मांग को और मजबूती देगा।
क्या है पूरा मामला
22 अप्रैल 2025 को हथियारबंद आतंकियों ने कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में पर्यटकों को निशाना बनाते हुए बड़ा हमला किया था। इस घटना में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें अधिकांश भारतीय नागरिक थे। इसे 2008 के मुंबई हमलों के बाद आम नागरिकों पर सबसे गंभीर हमलों में गिना गया। इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तेज हुआ। भारत ने सीमापार आतंकवाद के मुद्दे पर कड़े कूटनीतिक कदम उठाए, जिनमें व्यापार और वीजा प्रतिबंध जैसे फैसले शामिल रहे।
ऑपरेशन सिंदूर और सैन्य प्रतिक्रिया
हमले के बाद भारत ने 7 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान सीमापार आतंकी ढांचों को निशाना बनाया गया। सैन्य तनाव बढ़ने के बाद 10 मई को दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम की घोषणा हुई।
कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रियता
विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न देशों और कूटनीतिक समूहों के साथ बैठकों में भारत का पक्ष रखा। साथ ही, संसद के प्रतिनिधिमंडलों को भी विदेश भेजकर सीमापार आतंकवाद के मुद्दे पर समर्थन जुटाने का प्रयास किया गया। इससे पहले न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भी भारत ‘द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ टेररिज्म’ नामक प्रदर्शनी आयोजित कर चुका है, जिसमें मुंबई, पुलवामा और उरी जैसे हमलों को प्रदर्शित किया गया था।
वैश्विक जवाबदेही पर जोर
प्रस्तावित प्रदर्शनी में संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध आतंकी संगठनों का भी उल्लेख किया जाएगा। भारत का रुख स्पष्ट है कि आतंकवाद को समर्थन देने वाले तंत्र के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। भारत यह संदेश देना चाहता है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि मानवता और वैश्विक स्थिरता का प्रश्न है।


