बीबीएन, नेटवर्क। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे छह जिलों में दशकों से चली आ रही किसानों की समस्या के समाधान के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास लगाई गई कंटीली तार (फेंसिंग) को अब पीछे हटाने का फैसला लिया गया है, जिससे किसानों को अपनी जमीन तक निर्बाध पहुंच मिल सकेगी। साथ ही, जो भूमि फेंसिंग के पार रह जाएगी, उसके बदले किसानों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाएगा। इस संबंध में राज्य के गृह एवं न्याय विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है।
इन जिलों में लागू होगा आदेश
यह निर्णय पंजाब के सीमावर्ती जिलों फाजिल्का, फिरोजपुर, तरनतारन, अमृतसर, गुरदासपुर और पठानकोट में लागू किया जाएगा। इन क्षेत्रों में लंबे समय से किसान अपनी ही जमीन पर खेती करने में बाधाओं का सामना कर रहे थे।
क्या है पूरा मामला
वर्ष 1992 में सुरक्षा कारणों से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फेंसिंग की गई थी, लेकिन कई स्थानों पर यह तारबंदी वास्तविक सीमा से 1 से 2 किलोमीटर अंदर भारतीय क्षेत्र में स्थापित कर दी गई। इसके चलते बड़ी मात्रा में उपजाऊ भूमि फेंसिंग के पार चली गई। इसका परिणाम यह हुआ कि करीब 1.2 लाख किसान परिवारों को या तो अपनी जमीन से वंचित होना पड़ा या फिर सीमित समय और कड़ी सुरक्षा के बीच खेती करनी पड़ी। किसानों को प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक ही बीएसएफ की अनुमति से खेतों में जाने की अनुमति मिलती थी।
अब क्या बदलेगा
सरकार की योजना के तहत फेंसिंग को अंतरराष्ट्रीय सीमा के अधिक करीब, लगभग 150 से 200 मीटर तक स्थानांतरित किया जाएगा। इससे हजारों एकड़ कृषि भूमि पुनः किसानों की पहुंच में आ जाएगी और उनकी दैनिक कठिनाइयों में कमी आएगी।
प्रशासनिक प्रक्रिया होगी तेज
नई अधिसूचना के अनुसार अब उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को कलेक्टर स्तर की शक्तियां प्रदान की गई हैं। इससे भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े निर्णय जिला स्तर पर ही तेजी से लिए जा सकेंगे, जिससे लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा।
मुआवजा और पुनर्वास का आश्वासन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत की जाएगी। प्रभावित किसानों को बाजार दर के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा और पुनर्वास की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन निभाएगा। साथ ही, आपत्तियों के समाधान के लिए उचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था को भी मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय केवल किसानों के हित में ही नहीं, बल्कि सीमा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। फेंसिंग के पार स्थित क्षेत्रों में बीएसएफ को निगरानी में कठिनाई होती थी। नई व्यवस्था के तहत सुरक्षा बलों को बेहतर नियंत्रण मिलेगा और सीमा पार से होने वाली तस्करी तथा अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।



