बीबीएन,बीकानेर। राजस्थान सरकार ने बेटियों के जन्म, शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए संचालित लाडो प्रोत्साहन योजना की तृतीय एवं पश्चातवर्ती किस्तों के भुगतान की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं डिजिटल बना दिया है। शिक्षा विभाग ने शाला दर्पण पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। नई व्यवस्था के तहत पात्र बालिकाओं को जन्म से लेकर स्नातक स्तर तक विभिन्न चरणों में कुल 1.50 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इससे योजना का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने, भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाने और बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन देने में मदद मिलेगी।
बेटियों के जन्म से उच्च शिक्षा तक मिलेगा आर्थिक संबल
राज्य सरकार द्वारा संचालित लाडो प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य बालिकाओं के जन्म के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना, शिक्षा को बढ़ावा देना, लिंग आधारित भेदभाव को कम करना तथा बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों पर अंकुश लगाना है। योजना के तहत बालिका के नाम पर कुल 1.50 लाख रुपये की सहायता राशि विभिन्न चरणों में प्रदान की जाएगी। योजना के अनुसार सार्वजनिक चिकित्सा संस्थान में बालिका के जन्म पर 2,500 रुपये, सभी टीकाकरण पूर्ण होने पर 2,500 रुपये, प्रथम कक्षा में प्रवेश पर 4,000 रुपये, कक्षा 6 में प्रवेश पर 5,000 रुपये, कक्षा 10 में प्रवेश पर 11,000 रुपये तथा कक्षा 12 में प्रवेश पर 25,000 रुपये दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 21 वर्ष की आयु पूर्ण करने और स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने पर 1 लाख रुपये की अंतिम सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
ऑनलाइन और पारदर्शी होगी पूरी प्रक्रिया
नई SOP के अनुसार बालिका का पंजीकरण, सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया विभिन्न विभागों के समन्वय से ऑनलाइन संचालित होगी। जन्म के समय बालिका की यूनिक आईडी तैयार की जाएगी और संबंधित जानकारी पीसीटीएस, जन आधार तथा शाला दर्पण पोर्टल से जोड़ी जाएगी। विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों के प्रवेश और अध्ययन संबंधी विवरणों के आधार पर पात्रता का सत्यापन किया जाएगा। शिक्षा विभाग को तृतीय से छठी किस्त तक के भुगतान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए राजकीय एवं मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों के संस्था प्रधान, पीईईओ, यूसीईईओ, सीबीईओ तथा जिला शिक्षा अधिकारियों की भूमिका निर्धारित की गई है।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को मिलेगा बल
सरकार का मानना है कि योजना से बालिकाओं की स्कूलों में नामांकन और निरंतरता बढ़ेगी। आर्थिक सहायता मिलने से परिवारों को बेटियों की शिक्षा जारी रखने में मदद मिलेगी और उच्च शिक्षा के प्रति भी प्रोत्साहन मिलेगा। योजना को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप प्रभावी सामाजिक हस्तक्षेप माना जा रहा है।
विभागों के बीच समन्वय से होगा क्रियान्वयन
योजना के संचालन में महिला एवं बाल विकास विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, शाला दर्पण प्रकोष्ठ और एनआईसी की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। सभी विभागों के डेटा का एकीकरण कर लाभार्थियों की पहचान, सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जाएगा।



