बीबीएन,बीकानेर । दाउजी रोड स्थित आदि गणेश मंदिर में आदि गणेश भक्त मंडल के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालु भक्ति और आध्यात्मिकता के रंग में सराबोर हो गए। कथा वाचक पं. सुनील व्यास ने शुकदेव आगमन, भीष्म स्तुति, कपिल चरित्र, ध्रुव चरित्र और ऋषभदेव के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, आत्मज्ञान और धर्म के महत्व का संदेश दिया।
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि मनुष्य के सुख और दुःख का मूल कारण उसकी अशक्ति (आसक्ति) है। संसार की वस्तुओं में आसक्ति दुःख का कारण बनती है, जबकि यही आसक्ति यदि भगवान और उनकी भक्ति में हो जाए तो मोक्ष का द्वार खुल जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान पर पूर्ण भरोसा और अटूट विश्वास रखने वाले व्यक्ति के जीवन में कोई भी संकट स्थायी नहीं रह सकता कथा वाचक ने बताया कि शुकदेव के आगमन से भागवत कथा की ज्ञान और भक्ति से परिपूर्ण धारा प्रारंभ होती है। भीष्म स्तुति प्रसंग में उन्होंने पितामह भीष्म को धर्म, नीति और भक्ति का आदर्श बताते हुए कहा कि मृत्यु शैया पर भी भगवान कृष्ण का स्मरण कर उन्होंने यह संदेश दिया कि सच्चा भक्त हर परिस्थिति में ईश्वर को नहीं भूलता।
कपिल चरित्र के माध्यम से सांख्य योग के सिद्धांतों की व्याख्या करते हुए आत्मज्ञान और भक्ति को मोक्ष प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग बताया गया। वहीं ध्रुव चरित्र के प्रसंग में पांच वर्षीय बालक ध्रुव की अटूट श्रद्धा, तप और दृढ़ संकल्प का वर्णन करते हुए कहा गया कि सच्ची लगन और निष्ठा से असंभव लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। ध्रुव की भक्ति आज भी प्रत्येक युग के लिए प्रेरणा का स्रोत है। ऋषभदेव के चरित्र का वर्णन करते हुए कथा वाचक ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को आदर्श पिता बनने का प्रयास करना चाहिए। ऋषभदेव ने अपने पुत्रों को मानव जीवन का महत्व समझाते हुए दिव्य तप और अंतःकरण की शुद्धि का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि भगवान को समर्पित भाव से किया गया प्रत्येक कर्म ही वास्तविक तप है, जो अंततः अनंत सुख की प्राप्ति कराता है।
महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से धर्म और अधर्म के बीच अंतर स्पष्ट किया तथा मानवता को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। कथा के दौरान “जय श्री राधे” और “जय श्री श्याम” के जयकारों से पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। कथा के यजमान देव सोनी और सोहन सोनी ने सपत्नीक विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती संपन्न की। मंडल अध्यक्ष अविनाश चंद्र व्यास ने बताया कि कथा के तीसरे दिन जड़ भरत, राजा रहूगण को दिए गए उपदेश, भौगोलिक एवं खगोलीय वर्णन, नरक प्रसंग, अजामिल चरित्र, वृत्रासुर की भक्ति तथा प्रह्लाद चरित्र का वर्णन किया जाएगा। इस अवसर पर रामजी व्यास ने भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भागवत कथा श्रवण से मिटते हैं अनेक जन्मों के पाप
इधर गोपेश्वर बस्ती स्थित अमर ज्योति स्कूल के पास आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक पं. आनंद महाराज ने कहा कि भागवत कथा का श्रवण व्यक्ति के अनेक जन्मों के पापों का नाश करता है। उन्होंने राजा परीक्षित और शुकदेव संवाद का वर्णन करते हुए बताया कि भागवत कथा मनुष्य को धर्म, भक्ति और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करती है।
कथा के दौरान भगवान कृष्ण और विदुर प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान ने प्रेमवश विदुर के घर जाकर केले के छिलके तक स्वीकार किए, जिससे यह संदेश मिलता है कि भगवान को वैभव नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और प्रेम प्रिय है। कथा में मुख्य यजमान श्याम सुंदर सोनी ने पूजा-अर्चना करवाई।




