बीबीएन, नेटवर्क। राजस्थान पुलिस की सीआईडी (इंटेलिजेंस) ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के कथित फंडिंग नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपी पिछले करीब चार वर्षों से सोशल मीडिया के जरिए ISI हैंडलर के संपर्क में था और अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल कर भारतीय सेना से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं लीक करने के आरोपियों तक जासूसी के बदले धनराशि पहुंचाता था। इस मामले का संबंध जनवरी 2026 में दर्ज उस जासूसी प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें राजस्थान और असम से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। अब CID इस पूरे वित्तीय नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की गहन जांच कर रही है।
जासूसी नेटवर्क की आर्थिक कड़ी तक पहुंची CID
राजस्थान सीआईडी (इंटेलिजेंस) की जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि जनवरी 2026 में दर्ज जासूसी मामले में गिरफ्तार आरोपियों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की ओर से धनराशि सीधे नहीं भेजी जाती थी। इसके लिए एक अलग फंडिंग चैनल तैयार किया गया था, जिसका संचालन महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी रफीक चांद शेख कर रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से धन का लेन-देन करता था, जिससे जासूसी गतिविधियों में शामिल लोगों तक रकम पहुंचाई जा सके।
सोशल मीडिया के जरिए बना ISI से संपर्क
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी लगभग चार वर्षों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से ISI के एक हैंडलर के संपर्क में था। निर्देश मिलने पर उसने अपने नाम के अलावा अन्य व्यक्तियों के नाम से भी बैंक खाते खुलवाए और उन्हीं खातों का उपयोग संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के लिए किया।
जनवरी 2026 के जासूसी केस से जुड़ी गिरफ्तारी
सीआईडी की जांच का आधार जनवरी 2026 में दर्ज वह मामला बना, जिसमें जैसलमेर निवासी झबरा राम और असम के डिब्रूगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर एमटीएस के पद पर कार्यरत सुमित कुमार को भारतीय सेना से जुड़ी संवेदनशील सूचनाएं ISI तक पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आगे की जांच में वित्तीय लेन-देन की कड़ियां सामने आईं, जिसके बाद फंडिंग एजेंट की भूमिका उजागर हुई।
30 जून को हुई गिरफ्तारी, कई और नाम जांच के दायरे में
साक्ष्यों के आधार पर राजस्थान सीआईडी (इंटेलिजेंस) ने 30 जून 2026 को रफीक चांद शेख को गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े थे तथा देश विरोधी गतिविधियों के लिए धन किस स्तर तक पहुंचाया गया।
सुरक्षा एजेंसियों की नजर पूरे वित्तीय नेटवर्क पर
सीआईडी (इंटेलिजेंस) का कहना है कि जांच अभी जारी है। संदिग्ध बैंक खातों, डिजिटल संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। राज्य पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के विरुद्ध कार्य करने वाले किसी भी नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।





