बीबीएन, नेटवर्क। सूबे की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में सोमवार को सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई। कुख्यात डकैत जगन गुर्जर अपनी बैरक में मृत मिला। नियमित निरीक्षण के दौरान जेल कर्मियों ने उसे अचेत अवस्था में देखा और तत्काल अधिकारियों को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और एफएसएल टीम की प्रारंभिक जांच के बाद उसी बैरक में बंद हार्डकोर कैदी विष्णु को हत्या का आरोपी माना गया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। पूरे घटनाक्रम की विभिन्न पहलुओं से जांच जारी है।
नियमित जांच के दौरान खुला हत्या का राज
जेल प्रशासन के अनुसार दोपहर में रूटीन निरीक्षण के समय बैरक खोली गई तो जगन गुर्जर बेसुध पड़ा मिला। तत्काल चिकित्सा सहायता और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस, जेल प्रशासन और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और प्रारंभिक पूछताछ के आधार पर हत्या की पुष्टि हुई।
उसी बैरक में बंद कैदी विष्णु पर हत्या का आरोप
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जगन गुर्जर की हत्या उसी बैरक में बंद हार्डकोर आरोपी विष्णु ने की। पुलिस के अनुसार आरोपी ने पूछताछ के दौरान अपराध स्वीकार किया है। विष्णु चर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड से जुड़े मामले में जेल में बंद है। हालांकि पुलिस अभी घटना के कारण, परिस्थितियों और अन्य संभावित पहलुओं की विस्तृत जांच कर रही है।
साधारण युवक से कुख्यात डकैत बनने तक का सफर
जगन गुर्जर कभी दूध बेचने का काम करता था। वर्ष 1994 में उसके पिता, जो लोकदेवता बाबू महाराज के मंदिर में पुजारी थे, का मंदिर समिति के साथ प्रसाद वितरण को लेकर विवाद हुआ। पिता के अपमान के बाद जगन ने कथित रूप से समिति के कुछ लोगों के साथ मारपीट की और गिरफ्तारी से बचने के लिए बीहड़ों का रुख कर लिया। वहीं उसने डकैत मोहन गुर्जर के गिरोह से जुड़कर अपराध की दुनिया में कदम रखा।
तीन राज्यों में फैला था आतंक, 123 मामले दर्ज
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जगन गुर्जर के खिलाफ करीब 28 वर्षों में 123 आपराधिक मामले दर्ज हुए। इनमें हत्या, अपहरण और अन्य गंभीर अपराध शामिल रहे। उसका प्रभाव राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों तक माना जाता था। विभिन्न पुलिस मुठभेड़ों में भी उसका नाम सामने आता रहा।





