ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैसलमेर में थलसेना की रणनीतिक समीक्षा बैठक शुरू
बीबीएन, नेटवर्क, 24 अक्टूबर । थलसेना के शीर्ष कमांडर आज से जैसलमेर में शुरू हुई आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में नई रक्षा रणनीति और आधुनिक युद्ध की तैयारियों पर विचार-विमर्श किया गया। अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट आयोजित यह सम्मेलन सैन्य दृष्टि से अत्यंत अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में अग्निवीर योजना की समीक्षा और उसमें सुधार से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया गया।
सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह है कि अग्निवीरों की स्थायी नियुक्ति का प्रतिशत वर्तमान 25 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक किया जा सकता है। पहले बैच के अग्निवीर अगले वर्ष अपनी चार वर्षीय सेवा अवधि पूरी करेंगे, ऐसे में उनकी पुनर्नियुक्ति से जुड़ा यह निर्णय भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
पूर्व सैनिकों की भूमिका और ‘जॉइंटनेस’ पर जोर
सेना की बदलती संरचना में पूर्व सैनिकों की भूमिका को विस्तार देने पर भी चर्चा हुई। सरकार चाहती है कि उनकी विशेषज्ञता का उपयोग केवल सीमित संस्थानों तक न रहकर व्यापक स्तर पर हो। साथ ही, थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच साझा प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक सुधार और उपकरणों के मानकीकरण पर भी निर्णय लिए गए हैं। इन प्रयासों को भविष्य में थिएटर कमांड्स की स्थापना के लिए आधारशिला माना जा रहा है।
मिशन सुदर्शन चक्र और ऑपरेशनल समीक्षा
बैठक में सेना की ऑपरेशनल तैयारियों की व्यापक समीक्षा की गई। इसमें क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत, हथियार और गोला-बारूद की उपलब्धता, तथा आपातकालीन सैन्य खरीद पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही, ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ की प्रगति का मूल्यांकन भी किया जाएगा, जो तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बड़ी रणनीतिक बैठक
यह सम्मेलन मई में संपन्न हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सेना कमांडरों की पहली बड़ी बैठक है। इससे पहले इसका पहला चरण दिल्ली में आयोजित हुआ था। जैसलमेर चरण को निर्णायक माना जा रहा है, जहां देश की सुरक्षा नीति, सीमा पर हालात और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों पर गहन विमर्श किया जाएगा।
—


