बीबीएन, नेटवर्क | भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान सीमा के करीब स्थित नालिया एयरबेस पर एलसीए तेजस ऑपरेटर्स कॉन्फ्रेंस (OpCon) 2025 का सफल समापन किया। इस दो दिवसीय महामंथन में वायुसेना के जांबाज पायलटों, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने एक सुर में कहा की तेजस अब पूरी तरह परिपक्व हो चुका है और दुश्मन के किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए तैयार है।
सरहद के पास जुटी दिग्गजों की टोली
यह सम्मेलन वायुसेना की नंबर 18 स्क्वाड्रन ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ के घर (नालिया एयरबेस) में आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता साउथ वेस्टर्न एयर कमांड के एयर वाइस मार्शल केसवन नायर हरिशंकर ने की। इसमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
ओपकॉन 2025 की 5 बड़ी बातें:
एडवांस हथियारों से लैस होगा तेजस:
विमान में नई पीढ़ी की मिसाइलें और सटीक निशाना लगाने वाली हथियार प्रणालियों के एकीकरण पर सहमति बनी।
MK-1A वर्जन पर जोर:
जल्द ही वायुसेना में शामिल होने वाले उन्नत MK-1A वेरिएंट की तैनाती से भारत की हवाई ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।
मेंटेनेंस अब और आसान:
युद्ध के समय विमान को कम समय में दोबारा उड़ान के लिए तैयार करने (Turnaround time) और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
अग्रिम मोर्चे पर तैनाती:
अधिकारियों ने बताया कि बॉर्डर के पास के एयरबेस से स्वतंत्र रूप से ऑपरेशन चलाकर तेजस ने अपनी विश्वसनीयता साबित कर दी है।
फ्यूचर अपग्रेड:
बदलते सुरक्षा हालातों को देखते हुए विमान के रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम को और आधुनिक बनाया जाएगा।
क्यों अहम है यह कॉन्फ्रेंस?
मौजूदा क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए वायुसेना, डिजाइन एजेंसियों और इंडस्ट्री के बीच यह तालमेल बेहद जरूरी है। तेजस सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की हवाई ढाल बन चुका है। सम्मेलन में यह स्पष्ट हुआ कि तेजस अब केवल ट्रेनिंग या प्रदर्शन का विमान नहीं रह गया है, बल्कि एक ‘कॉम्बैट रेडी’ (युद्ध के लिए तैयार) प्लेटफॉर्म है। आने वाले समय में यह भारतीय वायुसेना की रीढ़ की हड्डी साबित होगा।

