बीबीएन, नेटवर्क, 26 जुलाई। भारत ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत का लोहा मनवाया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल में ड्रोन से छोड़ी जाने वाली प्रिसिशन गाइडेड मिसाइल ULPGM-V3 का सफल परीक्षण किया है। इस धमाकेदार परीक्षण ने देश की मिसाइल शक्ति को नई उड़ान दे दी है।
इस कामयाबी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी खुशी जाहिर करते हुए X (पूर्व में ट्विटर) पर बधाई दी। उन्होंने लिखा, “ULPGM-V3 के सफल फ्लाइट ट्रायल्स भारत की मिसाइल क्षमताओं को जबरदस्त बढ़ावा देने वाले हैं। DRDO, उसके इंडस्ट्री पार्टनर्स, MSMEs और स्टार्टअप्स को इस उपलब्धि के लिए ढेरों शुभकामनाएं। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।”
बता दें कि ULPGM-V3 मिसाइल को खासतौर पर ड्रोन से दागे जाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह हल्की, सटीक और बेहद घातक है। इससे पहले ULPGM-V2 को DRDO की टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैब (TBRL) ने विकसित किया था। नए संस्करण में इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) सीकर और डुअल थ्रस्ट प्रपल्शन जैसी आधुनिक तकनीकें जोड़ी गई हैं, जो इसे और घातक बनाती हैं।
DRDO ने इस परीक्षण के लिए कुरनूल स्थित नेशनल ओपन एरिया रेंज (NOAR) का इस्तेमाल किया। यह वही रेंज है जहां हाल ही में हाई-एनर्जी लेजर वेपन्स (DEW) के सफल ट्रायल्स हुए थे। इन हथियारों ने फिक्स्ड विंग ड्रोन और स्वार्म UAVs को हवा में ही ध्वस्त कर दिया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि ULPGM जैसी मिसाइलें भारत को आधुनिक युद्ध के मैदान में रणनीतिक बढ़त दिला सकती हैं। खास बात यह है कि इस पूरी प्रणाली का विकास भारत में ही हुआ है, जिससे देश की आत्मनिर्भरता को सीधा बल मिला है।
अब सवाल नहीं, जवाब देगा भारत — वो भी आसमान से!
ULPGM-V3 के सफल परीक्षण के साथ भारत ने दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अब वह रक्षा तकनीक में किसी से पीछे नहीं है। पाकिस्तान और चीन जैसे देशों की बौखलाहट अब और बढ़ सकती है।