बीबीएन,बीकानेर। जिले में शतरंज प्रतिभाओं को मंच देने के उद्देश्य से आयोजित अंडर-11 एवं अंडर-17 जिला शतरंज प्रतियोगिता का गुरुवार को बेसिक इंग्लिश कॉलेज में शुभारंभ हुआ। प्रतियोगिता के पहले दिन 62 बालक-बालिकाओं ने शतरंज की बिसात पर अपनी रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में अंडर-17 वर्ग के 40 तथा अंडर-11 वर्ग के 22 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। दोनों वर्गों के शीर्ष चार खिलाड़ी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित होंगे।
प्रतियोगिता का शुभारंभ वरिष्ठ शिक्षाविद एवं शतरंज प्रेमी रामजी व्यास ने पहली चाल चलकर किया। उद्घाटन समारोह में अखिल भारतीय शतरंज संघ के एस.एल. हर्ष, बीकानेर जिला शतरंज संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल बोड़ा, सचिव शैलेष गुप्ता और कोषाध्यक्ष हनुमान अग्रवाल मौजूद रहे।
अपने संबोधन में रामजी व्यास ने कहा कि शतरंज केवल खेल नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन की पाठशाला है। उन्होंने कहा कि जैसे शतरंज में साधारण मोहरा सही रणनीति और संरक्षण से वजीर बन जाता है, उसी प्रकार बच्चों की सही दिशा में परवरिश उन्हें बड़ी उपलब्धियों तक पहुंचा सकती है। उन्होंने अभिभावकों को बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। बीकानेर जिला शतरंज संघ के सचिव शैलेष गुप्ता ने बताया कि प्रतियोगिता जिले के उभरते खिलाड़ियों के लिए राज्य स्तर तक पहुंचने का महत्वपूर्ण मंच है। विजेता खिलाड़ियों को राजस्थान स्तरीय प्रतियोगिताओं में जिले का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा।
अखिल भारतीय शतरंज संघ के एस.एल. हर्ष ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि विश्वनाथन आनंद, डी. गुकेश और आर. प्रज्ञानानंद जैसे खिलाड़ियों ने निरंतर अभ्यास और समर्पण से विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। यदि युवा खिलाड़ी भी इसी लगन से आगे बढ़ते हैं तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल बोड़ा ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और खेलों में निरंतरता ही सबसे बड़ा मंत्र है। उन्होंने प्रतिभागियों और अभिभावकों को शुभकामनाएं देते हुए नियमित अभ्यास पर जोर दिया। प्रतियोगिता में हर्षवर्धन सिंह, दक्ष सिंह, चेतन खत्री, अनन्या सांखला, आरव दाधीच, एकलव्य गोस्वामी, आदित्य जोशी, नव्य व्यास, अविका और डिम्पल अग्रवाल सहित कई रेटेड खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इससे मुकाबले का स्तर और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ गए हैं।
युवा खिलाड़ियों में बढ़ रही शतरंज की लोकप्रियता
बीकानेर सहित राजस्थान के कई जिलों में पिछले कुछ वर्षों में शतरंज के प्रति बच्चों की रुचि तेजी से बढ़ी है। भारत के युवा ग्रैंडमास्टर्स की अंतरराष्ट्रीय सफलताओं के बाद अभिभावक भी बच्चों को इस खेल की ओर प्रेरित कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शतरंज बच्चों में विश्लेषण क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता, धैर्य और एकाग्रता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं उभरने की उम्मीद
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि जिला स्तर पर आयोजित ऐसी प्रतियोगिताएं प्रतिभाओं की पहचान का आधार बनती हैं। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने वाले अधिकांश खिलाड़ियों की शुरुआत इसी प्रकार की प्रतियोगिताओं से होती है। बीकानेर में लगातार आयोजित हो रहे शतरंज आयोजनों से आने वाले वर्षों में जिले से राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकलने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
कोषाध्यक्ष हनुमान अग्रवाल ने बताया कि प्रतियोगिता में विलंब से पहुंचने वाले पात्र खिलाड़ियों को भी निर्धारित नियमों के अनुसार भागीदारी का अवसर दिया जाएगा। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में कपिल पंवार, भानू आचार्य, बुलाकी हर्ष, आनंद व्यास, शिवरतन और शिवम पुरोहित शामिल हैं। प्रतियोगिता का दूसरा चक्र शुक्रवार सुबह 9 बजे खेला जाएगा।






