बीबीएन, नेटवर्क | सूबे की सियासत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से एक कथित पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस पत्र ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। खास बात यह है कि इस फेक लेटर को एक निजी न्यूज चैनल के लोगो और एआई (AI) का उपयोग करके तैयार किया गया था, जिससे यह पूरी तरह से असली प्रतीत हो रहा था। हालांकि, वसुंधरा राजे ने तुरंत इस पूरे प्रकरण को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक सुनियोजित साजिश बताया है। अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या था वायरल पत्र में?
वायरल हो रहे इस फर्जी पत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को संबोधित करते हुए भाजपा की चुनावी रणनीति और महिला आरक्षण विधेयक पर सवाल उठाए गए थे। पत्र में दावा किया गया था कि पार्टी केवल उन राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ाने पर केंद्रित है जहाँ उसका जनाधार मजबूत है। साथ ही, इसमें विपक्षी वोटों को विभाजित करने और 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करके एससी, एसटी और ओबीसी प्रतिनिधित्व को सीमित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। पत्र को विश्वसनीय बनाने के लिए अंत में वसुंधरा राजे के फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए थे।
राजे का स्पष्ट रुख और कानूनी एक्शन
मामले की गंभीरता को भांपते हुए वसुंधरा राजे ने खुद सामने आकर इस पत्र को ‘फर्जी और भ्रामक’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कुछ लोगों द्वारा फैलाया गया झूठ है। राजे ने स्पष्ट किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला आरक्षण के प्रयासों का पूरी तरह समर्थन करती हैं और देश की हर महिला इसका स्वागत करती है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए इसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का विरोध करने वालों की सोची-समझी साजिश बताया।
इस ‘फेक लेटर कांड’ को लेकर संबंधित निजी न्यूज चैनल ने जयपुर के ज्योति नगर थाने में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज कराया है। पुलिस अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामले की जांच कर रही है ताकि इसके पीछे के मास्टरमाइंड का पता लगाया जा सके।



