बीबीएन, नेटवर्क। भारतीय सेना अब युद्ध के मैदान में पूरी तरह से ‘स्वदेशी’ ताकत के साथ नजर आएगी। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने ‘प्रोजेक्ट रंजीत’ को बड़ी मंजूरी देते हुए करीब 57,000 करोड़ रुपये की लागत से 1,770 ‘फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल’ (FRCV) खरीदने का रास्ता साफ कर दिया है।
यह कदम न केवल सेना की मारक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि दशकों से रीढ़ की हड्डी रहे पुराने सोवियत टी-72 टैंकों की विदाई का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। यह नया प्लेटफार्म ‘मेक-I’ कैटेगरी के तहत तैयार हो रहा है, जिसमें सरकार प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए 70% तक की आर्थिक मदद देगी।
भविष्य की जंग के लिए ‘स्मार्ट’ टैंक
सेना के अधिकारियों के मुताबिक, रंजीत प्लेटफार्म केवल एक टैंक नहीं बल्कि एक ‘नेटवर्क-सेंट्रिक’ युद्ध प्रणाली है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
⭕ AI का कमाल: युद्ध के दौरान दुश्मन की पहचान और खतरों को भांपने के लिए इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग होगा।
⭕आसमान से निगरानी: इस टैंक में खुद के ड्रोन सिस्टम (Tethered Drones) लगे होंगे, जो लंबी दूरी तक दुश्मन की चाल पर नजर रखेंगे।
⭕मिसाइल कवच: इसमें लगा ‘एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम’ दुश्मन की एंटी-टैंक मिसाइलों को टैंक से टकराने से पहले ही हवा में नष्ट कर देगा।
⭕वजन में हल्का, रफ़्तार में तेज
जहाँ भारत का ‘अर्जुन’ टैंक करीब 68 टन का है, वहीं ‘रंजीत’ को 55-60 टन की श्रेणी में रखा गया है। कम वजन होने के कारण इसे भारतीय रेल और वायुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों के जरिए आसानी से सरहदों पर तैनात किया जा सकेगा।
तीन स्वदेशी योद्धाओं की तिकड़ी
रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की ‘आर्मर्ड ट्रायो’ (तीन हथियारों की जोड़ी) का अंतिम और सबसे अहम हिस्सा मान रहे हैं:
⭕ जोरावर: ऊँचे पहाड़ी इलाकों (लद्दाख) के लिए हल्का टैंक।
⭕ विक्रम (FICV): पैदल सेना के लिए मध्यम श्रेणी का लड़ाकू वाहन।
⭕ रंजीत (FRCV): मैदानी और रेगिस्तानी इलाकों के लिए सबसे घातक भारी टैंक।
2040 तक का मास्टर प्लान
वर्तमान में सेना अपने 1,200 टी-72 टैंकों का जीवनकाल बढ़ा रही है ताकि 2040 तक वे सेवा दे सकें। यह एक ‘ब्रिजिंग रणनीति’ है, ताकि जब तक 2030-2032 के बीच ‘रंजीत’ टैंकों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू न हो जाए, तब तक सीमाओं की सुरक्षा में कोई कमी न आए।



