बीबीएन, बीकानेर । मां करणी शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय, नाल में शनिवार को आयोजित “पहल एक छत तले शिक्षा, हुनर और रोजगार” कार्यक्रम ने बालिकाओं की प्रतिभा, कौशल और उद्यमी क्षमताओं को एक साथ सामने रखा। प्रदर्शनी, रोजगार मेला, सांस्कृतिक नाटिका और हस्तनिर्मित उत्पादों की बिक्री इन सभी गतिविधियों ने छात्राओं को शिक्षा के साथ आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आत्मविश्वास दिया। कार्यक्रम में छात्राओं द्वारा बनाई गई सामग्री की विविधता और गुणवत्ता ने आगंतुकों से खूब सराहना बटोरी।
कौशल और आत्मनिर्भरता संदेश
“पहल” का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को ऐसा मंच देना था, जहाँ वे अपनी रचनात्मकता को आय के अवसरों से जोड़ सकें। छात्राओं ने पेंटिंग, हैंडीक्राफ्ट, होम डेकोर, मेहंदी आर्ट और कई उपयोगी घरेलू वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई। हर स्टॉल पर युवतियों के नवाचार और कला की झलक दिखाई दी। नाटिका के माध्यम से आत्मनिर्भरता, लैंगिक समानता और आधुनिक शिक्षा के महत्व का संदेश भी दिया गया।
शिक्षा–कौशल समय की जरूरत
स्वामी विमर्शानंद महाराज ने कहा कि बालिकाओं के लिए शिक्षा और संस्कार दोनों अनिवार्य हैं तथा जब इनसे जुड़ता है कला और कौशल, तब समाज आगे बढ़ता है। उन्होंने “पहल” को भविष्य की संवेदनशील और सशक्त पीढ़ी गढ़ने वाला कदम बताया। MGSU की एसोसिएट प्रोफेसर एवं साहित्यकार डॉ. मेघना शर्मा ने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ बालिकाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूत करती हैं। उनके अनुसार शिक्षा तभी सार्थक होती है जब वह युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता तक ले जाए।
नाबार्ड के डीडीएम रमेश तांबिया ने ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल और उद्यमिता विकास को संस्थान का प्रमुख लक्ष्य बताते हुए कहा कि “पहल” जैसे कार्यक्रम बालिकाओं को बाजार, अवसर और अनुभव तीनों से जोड़ते हैं। उन्होंने छात्राओं को भविष्य में सफल उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित किया।
संस्थानों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में कॉलेज की छात्राओं के साथ बावा, एसबीआई, वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी सहित कई संस्थानों ने भी अपने स्टॉल लगाए। आयोजन में डॉ. दिनेश जैन, निशिता सुराणा, डॉ. ऋतु श्रीमाली, रेखा वर्मा, डॉ. पूनम मिड्ढा, सरिता पुरोहित, पंकज आचार्य, राकेश पुरोहित, शिवजी छंगाणी, कविता मेहरा, पूजा भाटी सहित अनेक शिक्षक व अधिकारी उपस्थित रहे।
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