बीबीएन,बीकानेर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने राजनीति विज्ञान विषय में वर्ष 2017 से पदोन्नति का लाभ देने की मांग को खारिज कर दिया है। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि अस्थायी अथवा तदर्थ आधार पर किए गए पदस्थापन को नियमित पदोन्नति नहीं माना जा सकता। यह आदेश राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण, जयपुर के निर्णय और राजस्थान शिक्षा (राज्य एवं अधीनस्थ) सेवा नियम-2021 के प्रावधानों के परीक्षण के बाद जारी किया गया। मामले में अपीलकर्ता ने वर्ष 2017 से व्याख्याता (राजनीति विज्ञान) के रूप में कार्य करने के आधार पर उसी तिथि से पदोन्नति मानने की मांग की थी, लेकिन विभाग ने नियमों और वरिष्ठता प्रावधानों का हवाला देते हुए दावा अस्वीकार कर दिया।
क्या है पूरा मामला ?
मामला अलवर जिले के एक राजकीय विद्यालय में कार्यरत व्याख्याता से जुड़ा है। अपीलकर्ता का कहना था कि वर्ष 2016-17 की डीपीसी के बाद उन्हें राजनीति विज्ञान विषय में पदस्थापित किया गया था और उन्होंने 1 फरवरी 2017 से उस पद पर कार्य भी किया। बाद में वर्ष 2021-22 की डीपीसी में उनका चयन व्याख्याता (हिंदी) पद पर हुआ, जिस पर विभागीय निर्देशों के कारण उन्हें कार्यग्रहण करना पड़ा। अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि चूंकि वे वर्षों तक राजनीति विज्ञान विषय का अध्यापन करती रहीं, इसलिए उन्हें 1 फरवरी 2017 से ही राजनीति विज्ञान विषय में नियमित व्याख्याता माना जाए।
विभाग ने क्यों खारिज की मांग
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2016-17 में की गई पदस्थापन प्रक्रिया नियमित पदोन्नति नहीं थी। उस समय राज्य सरकार ने बड़ी संख्या में उच्च माध्यमिक विद्यालयों के संचालन और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए रिक्त पदों पर अस्थायी व्यवस्था की थी। आदेश के अनुसार, उस अवधि की पदस्थापन सूची “पुनर्विचारित एवं पुनरीक्षित सूची” के आधार पर थी और इसे नियमित चयन या नियमित पदोन्नति की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। बाद में आयोजित नियमित डीपीसी में अपीलकर्ता का चयन हिंदी विषय के पद पर हुआ, जिसे विभाग ने वैध और नियमसम्मत माना।
नियम-36 बना फैसले का आधार
निदेशालय ने राजस्थान शिक्षा (राज्य एवं अधीनस्थ) सेवा नियम-2021 के नियम-36 का उल्लेख करते हुए कहा कि वरिष्ठता का निर्धारण नियमित चयन के बाद नियुक्ति की तिथि से किया जाता है। तदर्थ, अस्थायी या अंतरिम व्यवस्था के तहत की गई नियुक्ति को नियमित सेवा का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर विभाग ने कहा कि 1 फरवरी 2017 से राजनीति विज्ञान विषय में पदोन्नत मानने की मांग नियमों के अनुरूप नहीं है।



