⭕ एसआईआर प्रक्रिया पर गहलोत का हमला: ‘जल्दबाज़ी में बिगड़ रहा सिस्टम’
बीबीएन, नेटवर्क | सीकर में प्रेस वार्ता करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मौजूदा सरकार पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंस रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर सरकार ने दबाव, अव्यवस्था और बेहद कम समय-सीमा के कारण स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया है। गहलोत का आरोप है कि देशभर में बीएलओ की असामयिक मौतें इसी दबाव का परिणाम हैं, और सरकार को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
गहलोत ने सवाल उठाया कि जब 12 राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया चल रही है, तो राजस्थान में इतनी हड़बड़ी क्यों? उनके अनुसार चुनाव में अभी तीन साल का समय बाकी है, ऐसे में यह प्रक्रिया पारदर्शी और सहज तरीके से की जा सकती थी। उन्होंने कहा
“बीएलओ आत्महत्या इसलिए कर रहे हैं क्योंकि अवास्तविक समय-सीमाएं थोप दी गई हैं 4 तारीख तक नाम जोड़ने हैं और 9 को सूची जारी होनी है। यह जल्दबाज़ी संदेह पैदा करती है।”
🔹 अधिकारियों की पोस्टिंग पर तीखा वार
गहलोत ने कहा कि उनके शासनकाल में जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर भाजपा ने निशाना साधा था, वही अधिकारी आज सरकार की पहली पसंद बने बैठे हैं। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि पहले लगाए गए आरोप सिर्फ राजनीतिक थे और अब सरकार उन्हीं अधिकारियों पर भरोसा कर रही है।
🔹 जनहित योजनाओं को रोकने पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं को या तो रोक दिया गया है या जानबूझकर धीमा कर दिया गया है।
गहलोत ने कहा—
“योजनाएं किसी व्यक्ति की नहीं, सरकार की होती हैं। जनता के हित में शुरू की गई योजनाओं को रोकना समझ से परे है।”
उन्होंने पेंशन भुगतान में देरी पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया और कहा कि कई लोगों को तीन से सात महीने तक पेंशन नहीं मिली, जिससे आमजन परेशान हैं। उन्होंने कहा कि “सरकार नाम की कोई चीज़ दिखाई नहीं देती।”



