बीबीएन,बीकानेर। दाउजी रोड स्थित आदि गणेश मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन गुरुवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और नंदोत्सव का उल्लासपूर्ण आयोजन हुआ। कथा वाचक पं. सुनील व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि पृथ्वी पर बढ़ते अत्याचार और अधर्म के अंत के लिए भगवान विष्णु ने देवकी के गर्भ से श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। कथा के दौरान कृष्ण जन्म की झांकी, पुष्पवर्षा, भजन-कीर्तन और माखन-मिश्री प्रसाद वितरण ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया।
कथा में वासुदेव द्वारा नवजात कृष्ण को कारागार से गोकुल पहुंचाने, कंस के अत्याचार, देवकी-वसुदेव के कारावास और नंद बाबा के यहां बालकृष्ण के पालन-पोषण का विस्तृत वर्णन किया गया। व्यास ने कहा कि जैसे अंधकार को दूर करने के लिए एक दीपक पर्याप्त होता है, उसी प्रकार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अन्याय, अत्याचार और पाप के विनाश का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि भगवान का जन्म केवल मथुरा में नहीं, बल्कि हर उस हृदय में होता है जहां प्रेम, श्रद्धा और भक्ति का निवास होता है।
नंदोत्सव ने बांधा समां, भक्ति में डूबे श्रद्धालु
जैसे ही बाल स्वरूप श्रीकृष्ण की झांकी को सोहन सोनी नंद बाबा के रूप में लेकर कथा पंडाल में पहुंचे, पूरा परिसर “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” और “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर बाल गोपाल का स्वागत किया और भक्ति भाव में झूमते हुए नृत्य किया। मंदिर परिसर की आकर्षक सजावट और धार्मिक वातावरण ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।
धार्मिक आयोजनों का सामाजिक महत्व भी बढ़ा
धार्मिक और सांस्कृतिक विशेषज्ञों के अनुसार जन्माष्टमी और नंदोत्सव जैसे आयोजन केवल आस्था के पर्व नहीं हैं, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी हैं। देशभर में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु कृष्ण जन्मोत्सव में भाग लेते हैं, जिससे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है।
भविष्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण
बदलती जीवनशैली और डिजिटल युग के बीच ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक मूल्यों को जीवित रखने का कार्य कर रहे हैं। आयोजकों का मानना है कि आगामी दिनों में कथा के शेष प्रसंगों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने को मिलेगी। कथा के समापन पर भगवान की भव्य आरती उतारी गई तथा श्रद्धालुओं के बीच माखन-मिश्री, फल, टॉफी और मिठाइयों का प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर सोमदत्त पुरोहित, अविनाश चन्द्र व्यास, मनोज बिस्सा, राजकुमार खण्डेलवाल, मदन गोपाल व्यास, विजय श्रीमाली, जितेन्द्र श्रीमाली, देव सोनी, विष्णुनारायण बिस्सा, अंकित सोलंकी, गोपाल रंगा, किशन व्यास, रामसा व्यास, श्याम पारीक, सुधीर दाधीच, टी.सी. सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


