बीबीएन, बीकानेर। पश्चिमी सीमा से जुड़े चेतक कोर क्षेत्र में भारतीय सेना ने ऑपरेशनल तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। सप्त शक्ति कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहित मल्होत्रा ने 14 से 17 जुलाई तक बठिंडा, सूरतगढ़, बीकानेर, लालगढ़ जाटान, फाजिल्का और श्रीगंगानगर सैन्य स्टेशनों सहित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज व अन्य ऑपरेशनल क्षेत्रों का दौरा किया।
इस दौरान उन्होंने युद्धक तैयारियों, प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमताओं और लॉजिस्टिक व्यवस्था की समीक्षा की तथा आधुनिक युद्ध में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
कमांडरों से लिया तैयारियों का जायजा
दौरे के दौरान चेतक कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग और विभिन्न डिवीजनों के कमांडरों ने आर्मी कमांडर को क्षेत्र की ऑपरेशनल तैयारियों, प्रशिक्षण गतिविधियों, तकनीकी पहलों और सैन्य रसद से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी। लेफ्टिनेंट जनरल मोहित मल्होत्रा ने प्रशिक्षण केंद्रों और सैन्य इकाइयों का निरीक्षण करते हुए सैनिकों से संवाद किया। उन्होंने सभी रैंकों के सैनिकों की पेशेवर दक्षता और ऑपरेशनल प्रतिबद्धता की सराहना की।
वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित प्रशिक्षण की जरूरत
आर्मी कमांडर ने कहा कि प्रशिक्षण केवल अभ्यास तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे वास्तविक युद्ध परिस्थितियों और संभावित चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया जाना जरूरी है। उन्होंने प्रशिक्षण की निरंतरता, उसकी प्रासंगिकता और प्रभावी वैलिडेशन पर विशेष जोर दिया, ताकि सैनिक किसी भी परिस्थिति में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
ड्रोन युद्ध के दौर में तकनीकी बढ़त जरूरी
आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल मल्होत्रा ने नई तकनीकों को तेजी से अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों को मजबूत करने, मानव रहित हवाई प्रणालियों के संचालन में दक्षता बढ़ाने तथा उपलब्ध तकनीकी संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल को ऑपरेशनल प्रभावशीलता के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि तकनीकी श्रेष्ठता और निरंतर प्रशिक्षण ही युद्ध तत्परता को नई ऊंचाई दे सकते हैं।
नागी वॉर मेमोरियल में शहीदों को श्रद्धांजलि
दौरे के दौरान आर्मी कमांडर ने नागी वॉर मेमोरियल पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में हिस्सा लेने वाले पूर्व सैनिकों से भी मुलाकात की और उनके अनुभव सुने। यह संवाद सेना की गौरवशाली सैन्य विरासत और वर्तमान पीढ़ी के सैनिकों के बीच जुड़ाव का महत्वपूर्ण अवसर रहा।






