बीबीएन, नेटवर्क। साउथ वेस्टर्न कमांड के तत्वावधान में जयपुर मिलिट्री स्टेशन पर सोमवार को शुरू हुए सिक्योरिटी सिनर्जी सेमिनार ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर विमर्श को एक नई दिशा दी। “व्होल ऑफ़ नेशन एप्रोच (WoNA) टू काउंटर फ्यूचर कन्फ्लिक्ट्स” विषय पर आयोजित यह दो-दिवसीय सेमिनार, सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज़ (CLAWS) नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अवधारणा लेफ्टिनेंट जनरल मंजिंदर सिंह, आर्मी कमांडर, सप्त शक्ति कमान द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य सशस्त्र बलों, सिविल प्रशासन, उद्योग, शिक्षा जगत और समाज के बीच सुरक्षा समन्वय को मजबूत बनाकर एक एकीकृत राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचा विकसित करना है।
अपने उद्घाटन संबोधन में जनरल सिंह ने कहा कि आज के वैश्विक हालात अस्थिर और जटिल हैं, जहाँ युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, साइबर और सूचना क्षेत्र में भी लड़े जा रहे हैं। उन्होंने रूस–यूक्रेन और इज़राइल–हमास युद्धों का उदाहरण देते हुए कहा कि भविष्य के संघर्ष ‘मल्टी-डोमेन’ स्वरूप ले चुके हैं, जिनसे निपटने के लिए डिप्लोमेटिक, इन्फॉर्मेशनल, मिलिट्री और इकनॉमिक (DIME) शक्तियों का समन्वय आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि शासन, उद्योग और नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही राष्ट्रीय रेसिलिएंस बनती है यही ‘व्होल ऑफ़ नेशन’ दृष्टिकोण का सार है। आर्मी कमांडर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार’ की भावना को दोहराते हुए कहा कि “राष्ट्र की सुरक्षा हर नागरिक की आदत और आत्मा बननी चाहिए।”
सेमिनार में वरिष्ठ सैन्य रणनीतिकारों, पूर्व सैनिकों, कूटनीतिज्ञों, उद्योग विशेषज्ञों, राज्य प्रशासन के प्रतिनिधियों और जयपुर के विश्वविद्यालयों के 130 छात्रों ने भाग लिया। चर्चाओं का केंद्र सिटीजन वॉरियर्स की अवधारणा, मिलिट्री-सिविल फ्यूजन, और राज्यस्तरीय सुरक्षा ढांचे का पुनर्गठन रहा।
पहले दिन ‘द स्ट्रेटेजिक इम्पेरेटिव ऑफ़ व्होल ऑफ़ नेशन एप्रोच’ तथा ‘पार्टनरशिप बिल्डिंग – द पिलर्स ऑफ़ कोलैबोरेशन’ विषयों पर विशेष सत्र हुए, जबकि दूसरे दिन इनफार्मेशन ऑपरेशन्स और राज्य स्तरीय सुरक्षा ढांचे पर मंथन होगा। राजस्थान के लिए प्रस्तावित सुरक्षा मॉडल इस सेमिनार की प्रमुख उपलब्धि माना जा रहा है, जो अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि भारत की सुरक्षा अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि हर नागरिक की सहभागिता से सशक्त होगी। यह सेमिनार “आत्मनिर्भर भारत से विकसित भारत 2047” की दिशा में एक और ठोस कदम के रूप में उभरा है जहाँ सुरक्षा, नवाचार और नागरिक भागीदारी एक साथ राष्ट्र की ढाल बनती है।
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