🔴 दुबई के रास्ते अफगानिस्तान भागने की साजिश नाकाम
बीबीएन, नेटवर्क। सूबे की एटीएस ने एक बार फिर आतंकी नेटवर्क की रीढ़ तोड़ दी है। सांचौर से गिरफ्तार किया गया मौलवी ओसामा उमर अफगानिस्तान के खूंखार आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़ा हुआ निकला। चार साल से वह दुश्मन देश के आतंकियों से संपर्क में था और दुबई के रास्ते अफगानिस्तान भागने की फिराक में था।
राज्य की एटीएस टीम ने चार दिन की गहन पूछताछ के बाद ओसामा की साजिश का पर्दाफाश किया और उस पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। ये गिरफ्तारी इस बात का सबूत है कि आतंकी नेटवर्क अब धार्मिक चोले में छिपकर देश के भीतर नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रतिष्ठित परिवार का बेटा निकला गद्दारी के रास्ते पर
आईजी विकास कुमार के मुताबिक, ओसामा एक प्रतिष्ठित परिवार से है उसके नाना जमाते-हिंद संगठन में नायब हैं और परनाना वली मोहम्मद कभी बाड़मेर से विधायक रह चुके हैं। लेकिन परिवार की प्रतिष्ठा को धूल में मिलाते हुए ओसामा ने सोशल मीडिया के जरिए टीटीपी के कमांडर सैफुल्ला से संपर्क किया और इंटरनेट कॉलिंग से गुप्त बातचीत करता रहा।
चार और युवाओं को बना रहा था आतंक का मोहरा
एटीएस की जांच में खुलासा हुआ है कि ओसामा चार अन्य युवाओं मसूद पंडीपार, मोहम्मद अयूब, मोहम्मद जुनैद और बसीर पर कट्टरपंथी विचार थोपने की कोशिश कर रहा था। इन सभी को गुमराह कर आतंकी संगठन से जोड़ने की साजिश चल रही थी। फिलहाल एनआईए और आईबी की टीमें भी ओसामा से पूछताछ में जुटी हैं, ताकि इस नेटवर्क की जड़ें देशभर में कहां तक फैली हैं, इसका पता लगाया जा सके।
कट्टरता से मुक्ति की जंग
आईजी ने बताया कि राजस्थान एटीएस ने डीरेडिकलाइजेशन अभियान चलाया है, जिसके तहत समाज के उदार और शिक्षित वर्ग के लोग उन युवाओं की काउंसलिंग करते हैं जो नफरत और कट्टरता के दलदल में फंस रहे हैं। ओसामा जैसे मामलों से साफ है कि देश के भीतर आतंकी सोच की जड़ें कितनी गहरी हैं और अब जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार बन सकती है।
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