⭕ जालोर से कच्छ तक नया जलमार्ग
बीबीएन, नेटवर्क। राजस्थान लंबे इंतज़ार के बाद अब सीधी समुद्री कनेक्टिविटी की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहा है। जालोर जिले को कच्छ की खाड़ी के रास्ते अरब सागर से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना ने रफ्तार पकड़ ली है। लगभग 262 किलोमीटर लंबे वाटर-वे के लिए ड्रेजिंग पर 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च का प्रस्ताव है।
इस जलमार्ग के चालू होने के बाद राजस्थान एक बड़े लॉजिस्टिक हब के रूप में उभर सकेगा जहाँ उद्योग, परिवहन, वेयरहाउसिंग, कूल-चेन, पोर्ट सेवाओं और रोजगार के अवसरों में व्यापक वृद्धि होगी। प्री-फिज़िबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान, गुजरात व आसपास के क्षेत्रों में 50 हजार से अधिक नए रोजगार पैदा होने की संभावना है। वर्तमान में जालोर तक पहुँच के लिए संभावित मार्गों का सर्वे चल रहा है, जिसमें भवातरा–नवलखी–कांडला क्रिक रूट भी शामिल है। डीपीआर फाइनल होने के बाद जलमार्ग का पूरा ब्लूप्रिंट स्पष्ट होगा।
लॉजिस्टिक हब बनने का रास्ता खुला
लूनी–जवाई बेसिन और जालोर–बाड़मेर क्षेत्र में कपड़ा, पत्थर, कृषि उत्पाद, आयलशीड, ग्वार, दालें, बाजरा जैसी बड़े पैमाने की ट्रेडिंग होती है। जलमार्ग से भारी कार्गो की ढुलाई आसान होगी, जिससे सड़क और रेल पर दबाव कम होगा। माल ढुलाई क्षमता कई गुना बढ़ेगी और भारी-भरकम औद्योगिक इकाइयों के विकास को नई दिशा मिलेगी। साथ ही वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज, पोर्ट सेवाएं और इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित होने का मार्ग भी खुलेगा।
राष्ट्रीय जलमार्ग-48 पर एमओयू
मुंबई में राजस्थान रिवर बेसिन एवं जल संसाधन आयोजना प्राधिकरण और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के बीच हुए एमओयू के बाद इनलैंड पोर्ट निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। जवाई–लूनी–रन ऑफ कच्छ नदी प्रणाली को राष्ट्रीय जलमार्ग-48 घोषित करना इस परियोजना का बड़ा मोड़ माना जा रहा है प्रस्तावित जलमार्ग की चौड़ाई 45 मीटर, गहराई 8 मीटर और राजस्थान में इसकी कुल लंबाई लगभग 14 किलोमीटर होगी। सर्वे IIT मद्रास द्वारा किया जा रहा है।
सरकार का दावा
“एमओयू हो चुका है और डीपीआर अंतिम चरण में है। जालोर जलमार्ग से कच्छ से जुड़ेगा। यहां इनलैंड पोर्ट बनेगा और मालवाहक जहाज चलेंगे। यह पूरा क्षेत्र एक लॉजिस्टिक पावर कॉरिडोर के रूप में उभरेगा।”
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत





