बीबीएन, नेटवर्क। बदलते युद्ध परिदृश्य और उभरती रक्षा प्रौद्योगिकियों के बीच भारतीय सेना ने ड्रोन तकनीक और नवाचार को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की है। दक्षिणी कमांड की बैटल ऐक्स डिवीजन ने जयपुर में अकादमी-उद्योग संवाद कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें रक्षा क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधि, शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञ और भारतीय सेना के अधिकारी शामिल हुए।
इस संवाद का उद्देश्य ड्रोन नवाचार, काउंटर-ड्रोन तकनीक और मल्टी-डोमेन युद्ध क्षमताओं के क्षेत्र में सेना, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम में 50 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और इस बात पर विचार किया कि क्षेत्रीय प्रतिभा, शोध क्षमता और औद्योगिक नवाचार को किस प्रकार भारतीय सशस्त्र बलों की बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप जोड़ा जा सकता है। विशेषज्ञों ने स्वदेशी अनुसंधान, कौशल विकास और भविष्य की युद्धभूमि के लिए आवश्यक तकनीकी समाधान पर भी अपने विचार साझा किए।
संवाद के दौरान बिना चालक वाली प्रणालियों, काउंटर-ड्रोन तकनीक और बहु-आयामी सैन्य संचालन में ड्रोन की बढ़ती भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन तकनीक और उससे जुड़ी सुरक्षा प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के सहयोग से स्वदेशी तकनीक विकसित करना समय की आवश्यकता है। इस अवसर पर उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच साझेदारी के नए अवसरों पर भी विचार किया गया। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय स्तर पर विकसित नवाचार और तकनीकी समाधान देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
दक्षिणी कमांड की इस पहल को मिलिट्री-सिविल फ्यूजन अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करना और स्वदेशी तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ बनाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे संवाद मंच भविष्य में एक सशक्त और तकनीकी रूप से सक्षम रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।



