बीबीएन, नेटवर्क। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए, तकनीकी स्टार्टअप InsideFPV ने रक्षा मंत्रालय के एक महत्वपूर्ण ऑर्डर को रिकॉर्ड दो महीने के भीतर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। कंपनी द्वारा निर्मित यह ‘कामीकाजे’ और एफपीवी (First Person View) ड्रोन प्रणालियाँ न केवल भारतीय सेना की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाएंगी, बल्कि दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों से लेकर तपते रेगिस्तानों तक सटीक वार करने में सक्षम हैं। विशेष बात यह है कि ये ड्रोन जीपीएस सिग्नल के बिना (GPS-denied environments) और जैमिंग वाली परिस्थितियों में भी अपना लक्ष्य भेद सकते हैं।
शून्य से नीचे के तापमान में भी अचूक क्षमता

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन टैक्टिकल ड्रोन प्रणालियों का कड़ा परीक्षण किया गया है। ये ड्रोन -35°C की हाड़ कंपा देने वाली ठंड से लेकर 50°C की भीषण गर्मी में भी पूर्णतः सक्रिय रहते हैं। InsideFPV के सीईओ अर्थ चौधरी ने बताया कि इन ड्रोनों को विशेष रूप से भारत की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। दो महीने की अल्प अवधि में डिलीवरी देकर कंपनी ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह बिना गुणवत्ता से समझौता किए सैन्य समय-सीमाओं पर खरा उतरने में सक्षम है।
विस्तार और भविष्य की तैयारी

बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी अब अपने विनिर्माण कार्यों को 20,000 वर्ग फुट की एक नई और बड़ी फैसिलिटी में स्थानांतरित कर रही है। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य विदेशी घटकों पर निर्भरता कम करना और भारत सरकार के ‘घरेलू रक्षा उत्पादन’ के विजन को गति देना है।
नई तकनीक पर शोध जारी

केवल वर्तमान डिलीवरी तक ही सीमित न रहकर, कंपनी अब भविष्य की युद्ध कला के लिए अत्याधुनिक तकनीक पर काम कर रही है। इसमें मुख्य रूप से:
इंटरसेप्टर ड्रोन: दुश्मन के ड्रोनों को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता।
स्वार्म टेक्नोलॉजी: एक साथ कई ड्रोनों का झुंड बनाकर हमला करना।
जीपीएस-मुक्त नेविगेशन: सिग्नल न होने पर भी सटीक उड़ान और हमला। इन तकनीकों के विकास के साथ कंपनी अब भारतीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर ले जाने की योजना बना रही है।
