बीबीएन, नेटवर्क। भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk2 को दुनिया के सबसे आधुनिक युद्धक विमानों की श्रेणी में खड़ा करने के लिए एक क्रांतिकारी ‘ओपन आर्किटेक्चर एवियोनिक्स’ (OAA) तैयार किया है। यह विमान का वह ‘डिजिटल दिमाग’ है जो अब विदेशी कंपनियों के एकाधिकार को पूरी तरह खत्म कर देगा। ‘मॉड्यूलर ओपन सिस्टम अप्रोच’ (MOSA) पर आधारित इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके सॉफ्टवेयर और हथियारों को अपडेट करने के लिए अब विमान के बुनियादी ढांचे में छेड़छाड़ नहीं करनी पड़ेगी। इससे अपग्रेड की प्रक्रिया जो पहले वर्षों तक चलती थी, अब चंद महीनों में पूरी हो सकेगी।
उड़ान नियंत्रण और मिशन सिस्टम अब अलग-अलग
तेजस Mk2 की तकनीकी बनावट में सबसे अहम बदलाव इसका त्रि-स्तरीय कंप्यूटिंग पदानुक्रम है। इसमें विमान के उड़ने के लिए जिम्मेदार ‘डिजिटल फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर’ (DFCC) को मिशन सिस्टम से अलग रखा गया है। इसका बड़ा फायदा यह है कि यदि विमान के सॉफ्टवेयर या वेपन सिस्टम में कोई भी नया बदलाव किया जाता है, तो विमान के उड़ान संबंधी प्रमाणन (Certification) पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह एक ऐसा तकनीकी समाधान है जिसने पुरानी बाधाओं को जड़ से खत्म कर दिया है।
हथियारों का ‘प्लग-एंड-प्ले’ सेटअप
नए सिस्टम के आने से अब तेजस Mk2 में हथियारों को जोड़ना उतना ही आसान होगा जितना कंप्यूटर में पेनड्राइव लगाना। यूनिवर्सल आर्मामेंट इंटरफेस (UAI) की मदद से अब अस्त्र और रुद्रम जैसी मिसाइलों को बिना किसी जटिल कोडिंग के विमान के साथ जोड़ा जा सकेगा। पहले Mk1 संस्करण में इसके लिए लंबा वक्त लगता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और ‘कंटेनरीकृत’ कर दी गई है, जिससे युद्ध की स्थिति में विमान को तुरंत नए हथियारों से लैस किया जा सकेगा।
दुश्मन के रडार को देगा मात
तकनीकी रूप से यह विमान अब और भी घातक हो गया है। इसमें उत्तम एईएसए रडार और एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट (UEWS) के साथ फाइबर-आधारित हाई-स्पीड डेटा बैकबोन का इस्तेमाल किया गया है। इसकी खूबी यह है कि यदि युद्ध के दौरान दुश्मन रडार को जाम भी कर दे, तो सिस्टम तुरंत अन्य सेंसरों से डेटा लेकर पायलट को सटीक स्थिति बताता रहेगा। यह ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ की मदद से पायलट को युद्धक्षेत्र का एक स्पष्ट चित्र प्रदान करता है।
AMCA के लिए बनेगा आधार
यह तकनीक केवल तेजस तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पूरी वास्तुकला (Architecture) भारत के पांचवीं पीढ़ी के गुप्त लड़ाकू विमान AMCA के विकास के लिए एक ‘प्रूविंग ग्राउंड’ का काम करेगी। तेजस Mk2 के सफल परीक्षणों के बाद इसी सिस्टम को उन्नत करके AMCA में भी इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे भारत भविष्य के युद्धों के लिए पूरी तरह स्वदेशी रूप से तैयार होगा।




