बीबीएन, नेटवर्क । भारत की रक्षा तैयारियों, स्वदेशी सैन्य क्षमताओं और भविष्य की युद्ध रणनीतियों को लेकर आज राजधानी दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में ‘कलम और कवच 3.0’ सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ इस राष्ट्रीय सामरिक सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। सम्मेलन में देश की सैन्य नेतृत्व व्यवस्था, रक्षा उद्योग, नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, स्टार्ट-अप, शिक्षाविद और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि एक मंच पर जुटकर भारत की रक्षा संरचना को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने पर व्यापक चर्चा करेंगे।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ‘जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और नवाचार’ की रणनीतिक अवधारणा को आगे बढ़ाना है। इसके साथ ही स्वदेशी रक्षा उत्पादन, तकनीकी नवाचार, वैश्विक सहयोग और भविष्य की सैन्य चुनौतियों से निपटने की तैयारियों पर विशेष फोकस रहेगा। कार्यक्रम में तीनों सेनाओं के समन्वय, उन्नत रक्षा निर्माण, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सैन्य आधुनिकीकरण जैसे अहम विषयों पर मंथन किया जाएगा।
सम्मेलन में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित समेत रक्षा मंत्रालय, डीआरडीओ, इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद और विभिन्न सामरिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा मित्र देशों के रक्षा प्रतिनिधि, विदेशी राजदूत, रक्षा क्षेत्र की वैश्विक कंपनियां, भारतीय उद्योग जगत, MSMEs और रक्षा स्टार्ट-अप भी सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे।
कार्यक्रम के दौरान भविष्य की युद्ध क्षमताओं को लेकर कई उच्च स्तरीय सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित युद्ध प्रणाली, स्वायत्त सैन्य तकनीक, हाइपरसोनिक हथियार, क्वांटम-आधारित कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम, C4ISR क्षमताएं, अंतरिक्ष सुरक्षा और लो-अर्थ ऑर्बिट खतरों जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। विशेषज्ञ भारत की सामरिक क्षमता को आने वाले दशकों की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने पर विचार साझा करेंगे।
सम्मेलन में रक्षा उत्पादन को गति देने के लिए MSME भागीदारी, iDEX आधारित नवाचार, रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर और स्वदेशी निर्माण क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष चर्चा होगी। विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए रक्षा क्षेत्र में उत्पादन क्षमता विस्तार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही भारत की सामरिक साझेदारियों, सह-विकास मॉडल और भरोसेमंद वैश्विक सहयोग की संभावनाओं पर भी विमर्श होगा। सम्मेलन का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्वदेशी तकनीकी विकास के संतुलन के माध्यम से भारत अपने रक्षा औद्योगिक आधार को और अधिक मजबूत बना सकता है।


