बलजीत गिल. | बीबीएन,बीकानेर। पाकिस्तान सीमा से सटे बीकानेर, श्रीगंगानगर, जैसलमेर और बाड़मेर समेत पश्चिमी सरहद के सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए प्रशासन का व्यापक अभियान इसी माह शुरू होगा। रक्षा सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर तक के क्षेत्र में अतिक्रमण, अवैध निर्माण, संदिग्ध भूमि सौदों और गतिविधियों की पहचान के लिए विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। सर्वे के आधार पर नियमों के विपरीत पाए जाने वाले मामलों पर दिवाली से पहले कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही सीमावर्ती गांवों का डिजिटल डेटा बैंक तैयार कर जमीन, आबादी, निर्माण गतिविधियों और स्थानीय सूचना नेटवर्क की विस्तृत मैपिंग की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि सीमा सुरक्षा को केवल चौकियों और फेंसिंग से नहीं, बल्कि भूमि रिकॉर्ड, निर्माण गतिविधियों और स्थानीय सूचना तंत्र की निगरानी से भी मजबूत किया जा सकता है।
अमित शाह की बैठक के बाद बढ़ी सक्रियता
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में सीमावर्ती जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को विशेष निर्देश दिए गए थे। बैठक में सीमा सुरक्षा, भूमि उपयोग की निगरानी, सूचना तंत्र को मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने को प्राथमिकता दी गई। इसके बाद जिला प्रशासन ने जमीनी स्तर पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
15 किमी क्षेत्र में हर निर्माण की होगी पड़ताल
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सीमा से सटे क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में हुए निर्माण कार्यों, भूमि उपयोग में बदलाव और अतिक्रमण की प्रकृति का अध्ययन किया जाएगा। यदि किसी स्थान पर बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियां मिलीं तो यह भी जांच होगी कि निर्माण के लिए धन कहां से आया और उसका उद्देश्य क्या है। जांच का दायरा केवल कब्जों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संदिग्ध भूमि खरीद-फरोख्त और फर्जी दस्तावेजों की भी पड़ताल की जाएगी।
41 गांवों का तैयार होगा विस्तृत डेटा बैंक
जानकारी के अनुसार अति संवेदनशील माने जाने वाले जैसलमेर जिले के सीमावर्ती 41 गांवों का विस्तृत डेटा बैंक तैयार करने की योजना बनाई है। इसमें भूमि की स्थिति, निवास करने वाले समुदाय, कृषि गतिविधियां, सरकारी भूमि, निजी स्वामित्व, वैध-अवैध निर्माण और आधारभूत सुविधाओं का पूरा विवरण शामिल किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डेटा भविष्य में सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज साबित हो सकता है।
स्थानीय सूचना तंत्र बनेगा सुरक्षा की नई ताकत
सीमावर्ती क्षेत्रों में अक्सर स्थानीय सूचनाएं सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण साबित होती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पटवारियों, पशुपालकों, पूर्व सैनिकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और ग्राम स्तरीय कर्मचारियों को सूचना नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई गई है। पुलिस, बीएसएफ, आईबी और सैन्य एजेंसियों के बीच होने वाली मासिक बैठकों को भी अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
क्यों अहम है यह अभियान?
राजस्थान की पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा लगभग 1,070 किलोमीटर लंबी है, जो देश की सबसे संवेदनशील सीमाओं में शामिल है। बीकानेर, श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, जैसलमेर और बाड़मेर जिले इस सीमा से सीधे जुड़े हुए हैं। पिछले वर्षों में सीमा पार तस्करी, ड्रोन गतिविधियों और संदिग्ध नेटवर्क के मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में जमीन और निर्माण गतिविधियों की निगरानी को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा?
सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे राज्य सरकार और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को भेजा जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर अतिक्रमण हटाने, भूमि रिकॉर्ड अपडेट करने, निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल सीमा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में भी मददगार साबित होगी।




