बीबीएन,बीकानेर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत सोमवार को बीकानेर स्थित केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (CIAH) की वैज्ञानिक टीम ने सालासर और नौरंगों की बस्ती में किसानों से संवाद किया। अभियान के दौरान किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, आधुनिक बागवानी तकनीकों, जल संरक्षण, सरकारी योजनाओं के लाभ तथा कीट-रोग नियंत्रण के वैज्ञानिक उपायों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खेती अपनाने पर जोर देते हुए उत्पादन बढ़ाने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के व्यावहारिक सुझाव भी साझा किए।
राष्ट्रीय ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत गांवों में पहुंचे कृषि वैज्ञानिक
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निर्देशानुसार आयोजित इस अभियान में केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर के वैज्ञानिकों ने किसानों के बीच पहुंचकर टिकाऊ खेती की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञों ने बताया कि खेती की दीर्घकालिक सफलता के लिए केवल अधिक उत्पादन ही नहीं, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
संतुलित उर्वरक और प्राकृतिक खेती पर दिया विशेष जोर
प्रधान वैज्ञानिकों ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के साथ जैव उर्वरक, हरी खाद और प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इन उपायों से मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और उत्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।
बागवानी फसलों के लिए आधुनिक तकनीकों की जानकारी
कार्यक्रम में काचरी, ककड़िया, ग्वारफली, टिंडा, कुंदू, खेजड़ी, अनार, खजूर, आंवला, बेलपत्र तथा नींबू वर्गीय फसलों की वैज्ञानिक खेती पर विस्तार से जानकारी दी गई। किसानों को उन्नत किस्मों के चयन, पोषण प्रबंधन और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के बारे में भी मार्गदर्शन मिला।
कीट एवं रोग प्रबंधन के साथ जल संरक्षण पर भी फोकस
वैज्ञानिकों ने एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM), जैव नियंत्रण एजेंटों के उपयोग और ड्रिप सिंचाई जैसी जल बचाने वाली तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धतियों के उपयोग से लागत घटाई जा सकती है और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का बेहतर सामना किया जा सकता है।
किसानों को सरकारी योजनाओं की भी दी गई जानकारी
अभियान के दौरान किसानों को कृषि एवं बागवानी से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं, तकनीकी सहायता और संस्थान द्वारा उपलब्ध वैज्ञानिक परामर्श सेवाओं की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों से नई तकनीकों को अपनाकर टिकाऊ और लाभकारी खेती की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
अभियान में इन वैज्ञानिकों ने निभाई प्रमुख भूमिका
कार्यक्रम में संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. एस.आर. मीणा, डॉ. डी.के. समादिया, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रमेश कुमार सहित अन्य वैज्ञानिकों ने किसानों को वैज्ञानिक खेती, प्राकृतिक कृषि और आधुनिक बागवानी प्रबंधन की जानकारी देकर जागरूक किया।





