बीबीएन, बीकानेर | राजस्थान में प्रस्तावित ऑल इंडिया वार एग्जामिनेशन (AIBE) 2025 के लिए केवल जयपुर और जोधपुर को परीक्षा केंद्र बनाए जाने पर अभ्यर्थियों ने गंभीर आपत्ति जताई है।
अधिवक्ता राजेश राजपुरोहित की ओर से बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन को लिखे पत्र में बताया है कि राज्य के कई जिलों विशेषकर सीमांत, मरुस्थली और पहाड़ी क्षेत्रों से परीक्षार्थियों के लिए लंबी दूरी, कमजोर परिवहन सुविधा, रात्री यात्रा की बाध्यता और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चुनौती बढ़ गई है। राजपुरोहित का कहना है कि राजस्थान के आकार, भौगोलिक विविधता और जनसंख्या घनत्व को देखते हुए अधिक परीक्षा केंद्र आवश्यक हैं। इस मुद्दे पर कई क्षेत्रों से केंद्रों के पुनर्निर्धारण की मांग सामने आई है।
राजस्थान जैसे विशाल राज्य में केवल दो केंद्रों से बढ़ी परेशानी
अधिवक्ता राजेश राजपुरोहित के अनुसार, राजस्थान का क्षेत्रफल देश में सबसे बड़ा होने के कारण जयपुर या जोधपुर तक पहुँचना कई जिलों के लिए 500–700 किलोमीटर तक की यात्रा बन जाता है। महिलाओं और ग्रामीण परीक्षार्थियों के लिए यह दूरी और भी समस्यापूर्ण है, क्योंकि कई इलाकों में रात्री बस सेवा, रेल सुविधा और सुरक्षित यात्रा विकल्प उपलब्ध नहीं हैं।
राजपुरोहित का कहना है कि जब गुजरात, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में AIBE परीक्षा के लिए एकाधिक केंद्र स्थापित किए गए, तो राजस्थान जैसे भौगोलिक रूप से कठिन प्रदेश में केवल दो केंद्रों का चयन उचित नहीं है।
अन्य राज्यों में बहु-केंद्र व्यवस्था, राजस्थान में क्यों नहीं?
अन्य राज्यों में परीक्षा केंद्र अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, चंडीगढ़, गुरुग्राम, हिसार, भोपाल, इंदौर, इलाहाबाद, गाजियाबाद, लखनऊ, मेरठ, नोएडा और वाराणसी जैसे शहरों में बनाए गए हैं। इससे स्थानीय परीक्षार्थियों को आसान पहुँच मिली है। लेकिन राजस्थान में पिछले कई वर्षों से बड़ी परीक्षाओं को सीमित शहरों में केंद्रित करने से अभ्यर्थियों पर आर्थिक बोझ, यात्रा खर्च और समय की मुश्किल बढ़ती रही है। अभ्यर्थियों ने मांग की है कि राज्य के आकार और आबादी को देखते हुए उदयपुर, बीकानेर, अलवर, श्रीगंगानगर, कोटा और भरतपुर जैसे स्थानों को भी परीक्षा केंद्र बनाया जाना चाहिए।
‘स्थानीय अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त बोझ अनुचित’
राजपुरोहित का तर्क है कि परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में समान अवसर, भौगोलिक संतुलन और आवागमन की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपूर्ण प्रक्रिया तभी संभव है जब परीक्षा केंद्र इस प्रकार बनाए जाएँ कि किसी एक क्षेत्र के अभ्यर्थियों पर अनुपातहीन बोझ न पड़े। साथ ही, लंबी दूरी तय करने वाली महिलाओं और ग्रामीण युवाओं की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए भविष्य की परीक्षाओं में अधिक व्यावहारिक परीक्षा केंद्र नीति बनाने की आवश्यकता है।
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