बीबीएन,बीकानेर। गुरुद्वारा श्री नानक दरबार, लालगढ़ में पिछले 53 वर्षों से गुरु घर और संगत की सेवा में समर्पित रहे बाबा जोगिंदर सिंह को रविवार को भावभीनी विदाई दी गई। वर्ष 1974 में महज 11 वर्ष की आयु में सेवा शुरू करने वाले बाबा जोगिंदर सिंह ने अपना संपूर्ण जीवन गुरुद्वारा साहिब की सेवा को समर्पित कर दिया। उनकी विदाई के अवसर पर गुरुद्वारा परिसर श्रद्धा, सम्मान और भावनाओं से सराबोर दिखाई दिया। संगत ने विशेष अरदास कर उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की तथा ढोल-नगाड़ों के साथ उन्हें सम्मानपूर्वक उनके निवास तक पहुंचाकर अपने प्रेम और श्रद्धा का अनूठा परिचय दिया।
गुरुद्वारा श्री नानक दरबार, लालगढ़ में आयोजित विदाई समारोह में बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही। कार्यक्रम के दौरान श्री सुखमनी साहिब के पाठ का भोग डाला गया तथा अरदास के माध्यम से बाबा जोगिंदर सिंह के स्वस्थ एवं सुखमय जीवन की कामना की गई। संगत के सदस्यों ने कहा कि बाबा जोगिंदर सिंह ने पांच दशकों से अधिक समय तक बिना किसी स्वार्थ के गुरु घर की सेवा कर सेवा, समर्पण और विनम्रता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की है। उनकी सादगी, अनुशासन और गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा ने हजारों श्रद्धालुओं को प्रेरित किया है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 1974 में 11 वर्ष की आयु में गुरुद्वारा श्री नानक दरबार पहुंचे बाबा जोगिंदर सिंह ने सेवा को ही अपना जीवन बना लिया। बीते 53 वर्षों में उन्होंने न केवल गुरुद्वारा साहिब की व्यवस्थाओं को संभाला, बल्कि संगत के सुख-दुख में भी हमेशा सहभागी बने रहे। समारोह के बाद गुरुद्वारा परिसर में विशेष विदाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके पश्चात संगत ढोल-नगाड़ों और कीर्तन के साथ बाबा जोगिंदर सिंह को मुक्ता प्रसाद कॉलोनी स्थित उनके निवास तक छोड़ने पहुंची। इस दौरान श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर और जयकारों के साथ उनका अभिनंदन किया।
संगत ने विश्वास व्यक्त किया कि बाबा जोगिंदर सिंह की निष्काम सेवा, समर्पण और गुरु भक्ति की यह विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। उनके जीवन का यह अध्याय सेवा, त्याग और श्रद्धा की ऐसी मिसाल है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।


