बीबीएन, बीकानेर | जिला कारागार में बंद नशे के आदी कैदियों तक हेरोइन पहुंचाने की एक सुनियोजित कोशिश को जेल प्रशासन और पुलिस की सतर्कता ने विफल कर दिया। जेल के लंगर का सामान बताकर बाइक सवार दो युवक संतरी पोस्ट पर प्याज से भरे तीन थैले छोड़ गए, लेकिन जांच में मामला संदिग्ध मिलने पर तलाशी ली गई। एक प्याज के भीतर खाकी टेप से सीलबंद तीन पन्नियों में छिपाकर रखी गई 4.95 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) बरामद हुई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट और कारागृह अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला बीकानेर रेंज के हनुमानगढ़ जिले का है।
लंगर के नाम पर छोड़ा गया था सामान
जंक्शन थाना प्रभारी रामचन्द्र कस्वां के अनुसार जिला कारागार अधीक्षक योगेश कुमार तेजी ने सूचना दी कि दो अज्ञात युवक बाइक पर आए और संतरी पोस्ट पर तीन थैले यह कहते हुए छोड़ गए कि इनमें जेल के लंगर के लिए सब्जियां हैं। कुछ देर बाद सत्यापन करने पर पता चला कि उक्त सामान जेल प्रशासन द्वारा मंगाया ही नहीं गया था। इससे संदेह गहरा गया और पुलिस को सूचना दी गई पुलिस टीम ने जेल परिसर पहुंचकर जेल प्रशासन और स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में थैलों की जांच की। दो थैलों में केवल प्याज थे, जबकि तीसरे थैले में प्याज के साथ टमाटर, लहसुन और हरी मिर्च रखी हुई थी।
एक प्याज ने खोल दी पूरी साजिश
तलाशी के दौरान एक प्याज पर खाकी रंग की टेप लगी दिखाई दी। संदेह होने पर उसे काटकर देखा गया तो भीतर गुलाबी रंग की तीन छोटी पन्नियां मिलीं। इनमें हल्के क्रीम रंग का डलीनुमा पदार्थ भरा हुआ था। पुलिस अधिकारियों ने अनुभव के आधार पर इसे हेरोइन (चिट्टा) माना। इलेक्ट्रॉनिक कांटे से वजन करने पर नशीले पदार्थ का वजन 4.95 ग्राम और पैकिंग सहित कुल वजन 5.28 ग्राम पाया गया। पुलिस ने नियमानुसार मादक पदार्थ जब्त कर सील किया तथा नमूने सुरक्षित किए।
CCTV फुटेज से आरोपियों की तलाश
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों का उद्देश्य हेरोइन को किसी बंदी तक पहुंचाना था। जेल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस बाइक सवार दोनों युवकों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। मामले की जांच महिला थाना प्रभारी रजनदीप कौर को सौंपी गई है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हालांकि इस मामले में जेल प्रशासन की सतर्कता से तस्करी विफल हो गई, लेकिन घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि तस्कर जेल तंत्र की कमजोर कड़ियों को पहचानने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में जेल परिसरों में आने वाले प्रत्येक सामान की एक्स-रे स्कैनिंग, डिजिटल रिकॉर्डिंग और बहुस्तरीय जांच व्यवस्था की आवश्यकता और बढ़ेगी।



