बीबीएन, नेटवर्क | मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश के बाद अमेरिकी सेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती शुरू कर दी है। इस अभियान के तहत युद्धपोतों, उन्नत लड़ाकू विमानों, सोनार तकनीक से लैस जहाजों और हजारों मरीन सैनिकों को क्षेत्र में उतारा गया है। अमेरिका का उद्देश्य इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करना है, जबकि ईरान ने बिना शुल्क इसे खोलने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। ऐसे में क्षेत्र में युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच गया है और किसी भी समय टकराव की आशंका जताई जा रही है।
क्या है अमेरिका की रणनीति
अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट में बहुस्तरीय सैन्य रणनीति लागू की है। इस योजना के तहत उभयचर आक्रमण पोत USS Tripoli (LHA-7) को तैनात किया गया है, जो बड़ी संख्या में मरीन सैनिकों और आधुनिक विमानों के साथ पहुंचा है। इस पोत पर F-35B Lightning II और MV-22 Osprey जैसे अत्याधुनिक विमान मौजूद हैं। इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना ने जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों की पहचान और निष्क्रिय करने के लिए विशेष माइनस्वीपर जहाज और सोनार सिस्टम तैनात किए हैं। लिटोरल कॉम्बैट शिप जैसे छोटे युद्धपोत उथले पानी में ऑपरेशन के लिए सक्रिय हैं, जिनमें उन्नत अंडरवाटर ड्रोन और हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं।
ईरान की चेतावनी और जवाबी तैयारी
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी गतिविधियों को उकसावे की कार्रवाई बताते हुए कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसके जलक्षेत्र के पास आने वाले किसी भी विदेशी युद्धपोत पर कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि अमेरिका का दावा है कि हालिया हमलों में ईरान की नौसैनिक क्षमता को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन IRGC के पास अब भी तेज गति से हमला करने वाली सैकड़ों स्पीडबोट मौजूद हैं, जो छोटे दायरे की मिसाइलों और रॉकेट हथियारों से लैस हैं।
नाकाबंदी के संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी सफल होती है, तो इसका सबसे बड़ा असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। तेल और गैस निर्यात ठप होने से आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। दूसरी ओर, यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भी प्रभावित कर सकता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।
युद्धविराम पर संकट
मौजूदा हालात में सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि किसी भी पक्ष की ओर से गोलीबारी होती है, तो संघर्ष पूर्ण युद्ध में बदल सकता है। कूटनीतिक स्तर पर जारी प्रयासों के बावजूद, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों का बढ़ना स्थिति को और जटिल बना रहा है।



