बीबीएन, बीकानेर | दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में पूगल रोड स्थित माखनभोग उत्सव कुंज में श्रीकृष्ण कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। 27 दिसंबर से 2 जनवरी 2026 तक चलने वाले इस आयोजन में प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक कथा का वाचन किया जा रहा है। प्रथम दिवस कथा व्यास पर विराजमान साध्वी सुश्री जयंती भारती ने मीराबाई के जीवन प्रसंगों के माध्यम से भक्ति, विश्वास और वैराग्य का गहन संदेश दिया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मौजूद रही और पूरा पंडाल आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा।
साध्वी जयंती भारती ने बताया कि मीराबाई का जन्म मेड़ता के राजपरिवार में हुआ, लेकिन उनका मन बचपन से ही श्रीकृष्ण की भक्ति में रमा रहा। बाल्यावस्था में ही उन्होंने कृष्ण को अपना सर्वस्व मान लिया था। विवाह के उपरांत भी उनका जीवन सांसारिक मोह से दूर रहा और वे पूर्ण रूप से कृष्ण भक्ति में लीन रहीं। साध्वी जी ने मीराबाई के संघर्षपूर्ण जीवन की चर्चा करते हुए बताया कि कैसे सामाजिक दबाव, विरोध और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनका विश्वास कभी डगमगाया नहीं।
कथा में यह भी बताया गया कि मीराबाई ने सच्चे गुरु की खोज की और संत रैदास को अपना मार्गदर्शक स्वीकार किया। उनके उपदेशों से प्रेरित होकर मीरा ने भक्ति को ही जीवन का आधार बनाया। विष जैसी घोर परीक्षा में भी उनका अटूट विश्वास विजयी रहा, जो यह संदेश देता है कि सच्ची श्रद्धा हर संकट को पराजित कर सकती है।
इस अवसर पर साध्वी जयंती भारती ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा संचालित “संतुलन – तू है शक्ति” अभियान की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं को वैचारिक रूप से सशक्त बनाने और उनके विरुद्ध होने वाले भेदभाव व हिंसा के उन्मूलन के लिए समर्पित है। कथा के दौरान समाज में नारी सम्मान और आत्मबल के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
प्रथम दिवस की कथा में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सहित कई सामाजिक व राजनीतिक हस्तियों ने सहभागिता की। अतिथियों ने मंगल आरती में भाग लिया और कथा आयोजन की सराहना की। श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक संदेश के साथ श्रीकृष्ण कथा के पहले दिन का समापन हुआ।


