बीबीएन, नेटवर्क । सूबे में फर्जी FMG (Foreign Medical Graduate) सर्टिफिकेट रैकेट की जांच कर रही स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने रविवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार डॉक्टरों की पहचान राजू, नरेश और दीपक के रूप में हुई है, जिन्होंने कजाकिस्तान से MBBS की पढ़ाई की थी। जांच में सामने आया है कि FMG परीक्षा में असफल रहने के बावजूद इन डॉक्टरों ने कथित रूप से 20 से 30 लाख रुपए खर्च कर फर्जी FMG सर्टिफिकेट हासिल किए और मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप तथा चिकित्सकीय अभ्यास की तैयारी कर रहे थे।
SOG की जांच अब केवल डॉक्टरों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। एजेंसी ने अब तक 100 से अधिक संदिग्ध विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को चिन्हित किया है, जिनके दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
अब तक 17 गिरफ्तारियां, मास्टरमाइंड पहले से जेल में
इस बहुचर्चित मामले में अब तक 17 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें डॉक्टर, दलाल और राजस्थान मेडिकल काउंसिल से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। फर्जी FMG रैकेट का कथित मास्टरमाइंड भानाराम पहले से न्यायिक हिरासत में है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है और इसमें दस्तावेज सत्यापन प्रणाली की गंभीर खामियां उजागर हुई हैं।
क्या है FMG परीक्षा और क्यों जरूरी है इसका प्रमाणपत्र?
विदेश से MBBS करने वाले भारतीय छात्रों को भारत में चिकित्सकीय प्रैक्टिस के लिए FMG परीक्षा (अब राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की स्क्रीनिंग प्रक्रिया का हिस्सा) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होता है। यह परीक्षा सुनिश्चित करती है कि विदेशी विश्वविद्यालयों से पढ़कर लौटे डॉक्टर भारतीय चिकित्सा मानकों के अनुरूप हैं। जांच में सामने आया है कि कई अभ्यर्थी परीक्षा में सफल नहीं हो सके, जिसके बाद उन्होंने कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्रों का सहारा लिया। इन दस्तावेजों के आधार पर कुछ लोगों ने इंटर्नशिप तक शुरू कर दी थी।
स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर खतरे का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अपात्र व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं तो यह सीधे मरीजों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। यही कारण है कि SOG इस मामले को केवल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़े गंभीर अपराध के रूप में देख रही है।
RMC की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जांच का सबसे संवेदनशील पहलू राजस्थान मेडिकल काउंसिल की भूमिका है। प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि फर्जी दस्तावेजों के सत्यापन और पंजीकरण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं। यदि यह आरोप साबित होते हैं तो आने वाले दिनों में और अधिकारियों पर कार्रवाई संभव है।
आगे क्या?
SOG अब डिजिटल रिकॉर्ड, रजिस्ट्रेशन फाइलों, मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप आवंटन और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया की पड़ताल कर रही है। सूत्रों के अनुसार जांच का दायरा बढ़ने पर और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स के पंजीकरण की प्रक्रिया में व्यापक सुधार और डिजिटल सत्यापन तंत्र को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं।



